गढ़वाल विश्वविद्यालय की सुस्ती के कारण हजारों युवाओं का शिक्षक बनने का सपना टूट सकता है। प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों के 980 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू हो गई है, लेकिन विश्वविद्यालय ने परीक्षा के पांच माह बाद भी बीएड का रिजल्ट जारी नहीं किया है।
आवेदन की अंतिम तिथि से पहले विश्वविद्यालय ने तेजी नहीं दिखाई तो हजारों युवा हाथ मलते रह जाएंगे।
पांच माह पहले हुई थी परीक्षा
प्राइमरी स्कूलों में सहायक अध्यापकों की भर्ती के लिए बीएड व टीईटी पास अभ्यर्थियों को योग्य करार दिया गया है। गढ़वाल विवि ने पांच माह पहले बीएड की वार्षिक परीक्षा कराई थी।
इस बीच बीएड परीक्षा देने वाले युवाओं ने टीईटी भी पास कर लिया था। उनके प्रमाण पत्र डायट में पहुंच चुके हैं। लेकिन बीएड परीक्षा परिणाम जारी न होने से यह युवा भर्ती प्रक्रिया में आवेदन नहीं कर पा रहे हैं।
31 मार्च के बाद नहीं हो पाएगी
यह मौका इसलिए भी अहम है क्योंकि 31 मार्च 2014 के बाद प्राइमरी विद्यालयों में बीएड टीईटी पास अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं मिल पाएगी।
अब इन टीईटी पास युवाओं के पास केवल 22 फरवरी तक का ही मौका बचा हुआ है। इसके बाद आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
कालेज भी जिम्मेदार
गढ़वाल विवि का कहना है कि रिजल्ट में देरी के लिए कुछ हद तक कालेज भी जिम्मेदार हैं। कुलसचिव पीएस राना ने बताया कि कालेजों ने समय से प्रैक्टिकल परीक्षा के अंक नहीं भेजे थे। बहरहाल, उन्होंने कहा कि परिणाम जल्द जारी करने की कोशिश की जा रही है।
6500 बीएड हर साल
गढ़वाल विवि के बीएड कालेजों में बीएड की 6500 सीटें हैं। हर साल यहां से इतने छात्र उत्तीर्ण होते हैं। इस वर्ष भी करीब इतने ही छात्र पासआउट होने हैं, जिनका परिणाम अटका हुआ है।