ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबी-फारसी यूनिवर्सिटी में अब स्टूडेंट्स हिंदी में भी पढ़ाई कर सकेंगे और परीक्षा भी दे सकेंगे।
अभी तक यहां पर परीक्षा में उर्दू व इंग्लिश में ही सवाल पूछे जाते थे। उर्दू एलीमेंट्री लेवल तक ही स्टूडेंट्स को अनिवार्य रूप से पढ़ाई जाएगी।
वहीं यूनिवर्सिटी में गर्ल्स व ब्वॉयज के हॉस्टल जल्द तैयार किए जाएंगे। इसकी क्षमता 500 स्टूडेंट्स की होगी।
इसके अलावा राजधानी के मुख्य स्थानों से यूनिवर्सिटी तक पहुंचने के लिए परिवहन विभाग की मदद से शटल बस सेवा शुरू की जाएगी।
स्टूडेंट्स की संख्या को बढ़ाने के लिए कुलपति प्रो. खान मसूद अहमद ने यह एक्शन प्लॉन तैयार किया है।
गुरूवार को यूनिवर्सिटी में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने बताया कि नए शैक्षिक सत्र से स्टूडेंट्स की संख्या बढ़ाने पर वह पूरा जोर दे रहे हैं।
कुलपति प्रो. खान मसूद अहमद ने बताया कि अभी उर्दू के अलावा इंग्लिश में सवाल पूछे जाने और पढ़ाई करवाने के चलते यहां पर स्टूडेंट कम आ रहे हैं।
दरअसल यहां पर ग्रामीण परिवेश के स्टूडेंट अधिक आते हैं और उन्हें इंग्लिश उतनी अच्छी नहीं आती।
ऐसे में अब हम हिन्दी माध्यम से भी उन्हें पढ़ाई करवाएंगे और परीक्षा में सवाल भी पूछेंगे। ताकि वह आराम से पास हो सकें।
उन्होंने कहा कि स्टूडेंट्स के मन से इंग्लिश का भय दूर करने के लिए उन्हें यहां पर कम्युनिकेटिव इंग्लिश अलग से पढ़ाई जाएगी।
इसके अलावा यूनिवर्सिटी अपना प्रचार करेगी कि यहां पर उर्दू, अरबी-फारसी भाषाओं के अलावा यहां पर मार्डन कोर्स भी पढ़ाए जाते हैं। इसके अलावा यहां पर उर्दू, अरबी व फारसी भाषाओं के अनुवादक भी तैयार किए जाएंगे।
अब 31 जुलाई तक स्टूडेंट कर सकेंगे आवेदन
ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबी-फारसी यूनिवर्सिटी में अब दाखिले के लिए स्टूडेंट 31 जुलाई तक आवेदन कर सकते हैं।
यहां पर एमए, एमकॉम, एमबीए, एमजेएमसी, बीए, बीकॉम, बीबीए, बीसीए, बीएचएससी, बीजेएमसी कोर्स पढ़ाए जा रहे हैं।
यूनिवर्सिटी का मानना है कि अभी दाखिले की प्रक्रिया हर यूनिवर्सिटी व कॉलेज में चल रही है। ऐसे में समय बढ़ाने से इस यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट बढ़ सकते हैं।