एशिया और अफ्रीका के लोगों के लिए पश्चिमी तरीके का विकास सही नहीं होगा, क्योंकि एशिया की विश्व में अपनी अलग भूमिका है। ये बातें नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. युआन टीली ने शुक्रवार को एमिटी यूनिवर्सिटी में कहीं है।
सेक्टर-125 स्थित एमिटी यूनिवर्सिटी में शुक्रवार को विशेष दीक्षांत समारोह आयोजित हुआ। इसमें वैज्ञानिक डॉ. युआन टीली को डाक्टरेट ऑफ साइंस, सेशेल्स के उपराष्ट्रपति डैनी फुरे और नॉलेज मैनेजमेंट एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट, एशियन डेवलपमेंट बैंक की उपाध्यक्ष बिंदु एन लोहानी को डाक्टरेट ऑफ फिलॉस्फी की मानद उपाधि देकर सम्मानित किया गया।
साथ ही ‘सस्टेनेबिलिटी एजेंडा फॉर एशिया एंड द पैसिफिक-ट्रेंड एंड फ्यूचर’ विषय पर सम्मेलन हुआ। इस मौके पर डॉ. टीली ने कहा कि उनके जीवन को महात्मा गांधी ने बेहद प्रभावित किया है क्योंकि गांधी जी ने जीवन भर लोगों और समाज के लिए कार्य किया है।
वहीं, उपराष्ट्रपति डैनी फुरे ने उपाधि को सेशेल्स के नागरिकों को समर्पित किया। अपने संबोधन में डैनी ने कहा कि भविष्य निर्माण के लिए आपको अपना ध्येय बहुत ऊंचा रखना होगा और स्वयं को गिरने से बचाना होगा।
दूसरी ओर डॉ. बिंदु एन लोहानी ने कहा कि 2050 तक एशिया पैसफिक क्षेत्र बाकी दुनिया में सबसे अमीर हो जायेगा और सात प्रमुख देशों में से भारत का योगदान सबसे अधिक होगा।
बस भारत को अपने मानव संसाधन पर ध्यान देने की जरूरत है। कार्यक्रम में एमिटी यूनिवर्सिटी, यूपी के चांसलर अतुल चौहान, असीम चौहान, डॉ. बलविंदर शुक्ला, डॉ. डीवी सिंह, के जय सिंह, डॉ. गुरिंदर सिंह समेत अन्य लोग मौजूद रहे।