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और यहां आकर ताजा हो गईं 25 साल पुरानी यादें

Wed, 25 Dec 2013 09:56 AM IST
अमर उजाला, चंडीगढ़
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यूबीएस के पूर्व छात्रों ने जब 25 साल पुराने अपने अनुभवों को स्टेज पर सांझा किया तो माहौल कभी माहौल खुशनुमा तो कभी भावुकता से भर गया।
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मंगलवार को पंजाब यूनिवर्सिटी के यूनिवर्सिटी बिजनेस स्कूल (यूबीएस) में 1988 बैच की सिल्वर जुबली एलुमनी मीट हुई।

सभी ने पीयू कैंपस के अनुभवों को सांझा कर पुरानी यादों को ताजा किया। सुबह 10 बजे पीयू के इंग्लिश ऑडिटोरियम में कार्यक्रम की शुरू हुआ।

चेयरमैन प्रो. एके वशिष्ठ ने यूबीएस के लाहौर से डलहौजी और पीयू तक के सफर की यादों को ताजा किया। मुख्य अतिथि पीयू के वीसी प्रो. अरुण कुमार ग्रोवर ने कहा कि वे यूबीएस के लिए अलग कैंपस की तैयारी में है, लेकिन अभी उतना फंड नहीं जुटा पाए हैं। उन्होंने माना कि पीयू को दुनिया की टॉप यूनिवर्सिटी रैंकिंग दिलाने में यूबीएस की भूमिका भी खास है।

एलुमनी मीट में 88 बैच से एमकॉम करने वाले नौ और एमबीए करने वाले चार विद्यार्थी पहुंचे। इनमें से कोई पुलिस अधिकारी तो कोई नामी कंपनी में एमडी है।

सभी ने स्टेज पर बारी-बारी से अपने अनुभवों को सांझा किया। दोपहर बाद यूबीएस में सभी एलुमनी की इंट्रेक्शन हुई। फिर रंगारंग कार्यक्रम ने सभी को झूमने पर मजबूर कर दिया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. दिनेश गुप्ता और प्रो. संजय कौशिक ने किया।
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पुरानी सहेलिया फिर से मिली एल्युमनी मीट में
यूबीएस की एलुमनी मीट में 88 बैच की दो छात्राएं जब स्टेज पर पहुंची तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। पीयू के इवनिंग विभाग में कार्यरत्त डॉ. वंदना मैनी ने बताया कि उनकी फ्रेंड प्रेरणा न सिर्फ यूबीएस, बल्कि स्कूल दिनों में भी क्लास मैट रही हैं।

दोनों ने चंडीगढ़ के कार्मल कान्वेंट स्कूल से एक साथ पढ़ाई की थी। एक अन्य पूर्व छात्रा डॉ. जितेंद्र कौर सेक्टर-26 स्थित गुरु गोबिंद सिंह कॉलेज फॉर वुमन में कॉमर्स विभाग की हेड हैं।

उन्होंने बताया कि तीनों सहेलियों ने एक साथ यूबीएस से कॉमर्स की डिग्री हासिल की ओर फिर पीएचडी भी यहीं से की।
 
प्रो. दिनेश गुप्ता का खौफ 25 साल बाद भी  
एलुमनी मीट में कुछ पल ऐसे भी आए जब पुराने विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों से जुड़ी यादों को ताजा किया। जसबीर गिल ने कहा कि इतने बरसों बाद भी प्रो. दिनेश उतने ही यंग दिखते हैं।

एलुमनी संजय जैन ने कहा कि प्रो. दिनेश गुप्ता का उन दिनों टेरर होता था। इसी तरह कुछ अन्य स्टूडेंट ने भी जब प्रो. गुप्ता के अनुशासित स्वभाव पर चुटकी ली तो पूरा हाल तालियों से गूंज उठा।

यूबीएस प्रो. मनोज कुमार को जब स्टेज पर बुलाया गया तो उनके समर्थन में जमकर तालियां बजाई गई, इस सीन को देखकर हर कोई हैरान था।  

गुरुओं के गुरु भी पहुंचे
साठ के दशक में पंजाब यूनिवर्सिटी में यूनिवर्सिटी बिजनेस स्कूल (यूबीएस) को शुरू करने वाले कई शिक्षक भी पहुंचे। मौजूदा शिक्षकों ने अपने शिक्षकों को पैरों को हाथ लगाकर उनसे आशीर्वाद लिया।

विभाग के फाउंडर मेंबर प्रो. केके उप्पल ने कहा कि उन्हें फख्र होता है कि उनका स्टूडेंट प्रो. दिनेश गुप्ता गोल्ड मेडल विजेता रहा है। एलुमनी मीट में यूबीएस के रिटायर्ड प्रोफेसर केके मंगला ने भी अपने अनुभव सांझा किए।  

सीटीयू बस की दिक्कत तो मुझसे मिलना: टीपीएस फुलका
यूबीएस 88 बैच के स्टूडेंट रहे पीसीएस अधिकारी तेज प्रताप सिंह भी कार्यक्रम में पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि इतने सालों बाद भी उन्हें लगता है कि कल ही की तो बात है।
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उन्होंने स्टेज से अगर किसी भी यूबीएस वाले को सीटीयू में कोई दिक्कत आए तो उन्हें याद कर ले। इतना सुनते ही पूरे हॉल में तालियां बजने लगीं।
 
इतना वक्त नहीं मेरे पास...
एल्युमनी बिमला जसवाल ने कहा कि एक बार जब उनके शिक्षक ने उन्हें तीन दिन तक लगातार बुलाया तो उन्होंने कह दिया कि उनके पास इतना वक्त नहीं है।

उन्हें लगा कि उनके इंटरनल अंक कट जाएंगे, लेकिन उन्हें सबसे अधिक 46 अंक दिए।  
 
-एसोसिएट प्रोफेसर जसविंदर कौर ने कहा कि यूबीएस में बिताया समय गोल्डन पीरियड रहा।
-यूबीएस की छात्रा बलविंदर कौर ने बताया कि उन्होंने गांव के बच्चों को शिक्षित करने के लिए स्कूल शुरू किया है। इस जानकारी पर पूरे हॉल में जमकर तालियां बजीं।
-कार्यक्रम में एडिशनल डायरेक्टर जनरल रेवेन्यू मनोज के अरोड़ा और एमपी में आईजी विजय कटारिया ने भी शिरकत की। 
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