मिलिए एआईपीएमटी में टॉप-100 में जगह बनाने वाली इन जुड़वा बहनों काव्यांजलि और कनुप्रिया से। दोनों खूबियों का भंडार हैं। प्रतिभा कूट-कूट कर भरी हुई है। हिसार की रहने वाली इन बहनों को पहली दफा देखने वाला शख्स कोई अंतर नहीं बता पाएगा।
बचपन से दोनों बहनें हर क्लास में साथ-साथ पढ़ीं। दसवीं और बारहवीं की परीक्षा में भी दोनों ने लगभग एक जैसे ही अंक प्राप्त किए। अब दोनों बहनें डॉक्टरी की पढ़ाई (एमबीबीएस) भी साथ-साथ ही करेंगी। दोनों बहनों ने एआईपीएमटी परीक्षा में शानदार प्रदर्शन किया है। काव्यांजलि ने परीक्षा में ऑल इंडिया स्तर पर 20वीं और कनुप्रिया ने 58वीं रैंक हासिल की है।
साथ एडमिशन न होने से दुखी थी कनुप्रिया
दोनों बहनों ने एम्स की परीक्षा भी दी थी। काव्यांजलि का परीक्षा में रैंक थोड़ा अच्छा था, तो उसका दाखिला पहली काउंसिलिंग में ही हो गया। कनुप्रिया का रैंक में पीछे थी। कनुप्रिया के मुताबिक वे दोनों हर क्लास में साथ-साथ ही पढ़ती आई हैं। वे चाहती थीं कि एमबीबीएस भी एक ही कॉलेज से करें। अब दोनों की रैंक ऐसी है कि एक ही कॉलेज में दाखिला मिल जाएगा और दोनों मेडिकल की पढ़ाई भी साथ-साथ कर सकेंगी।
बोर्ड परीक्षाओं में भी आए एक जैसे अंक
इससे पहले दोनों बहनों ने बोर्ड परीक्षा में भी एक जैसे ही अंक आए। दसवीं की परीक्षा में दोनों बहनों ने 10.0 सीजीपीए प्राप्त किए। बारहवीं की परीक्षा में कनुप्रिया के 96.0 व काव्यांजलि के 95.8 प्रतिशत अंक आए। इसके अलावा लाला लाजपतराय यूनिवर्सिटी की बीवीएससी के एंट्रेंस एग्जाम में कनुप्रिया ने टॉप किया था, तो काव्यांजलि ने तीसरा रैंक हासिल किया।
कनुप्रिया ने बताया कि उन्होंने एचएयू के कैंपस में दाखिला लिया हुआ था। इसके अलावा वे मलिक ट्यूटोरियल से कोचिंग भी ले रही थी। वे दिन में 14-14 घंटे तक पढ़ती थीं। दोनों की बायोलॉजी विषय में रुचि थी, तो दसवीं के बाद मेडिकल स्ट्रीम को चुना।
मां-बाप को बेटियों पर गर्व
कनुप्रिया और काव्यांजलि के पिता डॉ. सत्यवीर कुंडू एचएयू में बतौर साइंटिस्ट कार्यरत हैं। फिलहाल उनकी पोस्टिंग सादलपुर के केवीके स्टेशन पर है। मां सुदेश देवी एक गृहिणी हैं। दोनों का कहना है कि उन्हें अपनी बेटियों पर गर्व है। उन्होंने अपनी बेटियों को कभी भी बेटों से कम नहीं आंका।