फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इंडस्ट्री के हिसाब से पढ़ेंगे अकाउंटिंग

Sat, 19 Oct 2013 02:14 AM IST
सचिन त्रिपाठी/लख्ननऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
सीआईएससीई (काउंसिल फॉर इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन) बोर्ड के स्टूडेंट्स इंडस्ट्री की डिमांड के हिसाब से अकाउंटिंग का पाठ पढ़ेंगे।
विज्ञापन


बोर्ड ने 12वीं में कॉमर्स का कोर्स बदल दिया है। इसके बाद स्टूडेंट्स बैलेंस शीट के उसी फॉर्मेट की पढ़ाई करेंगे जिस पर कंपनी अपने खाते तैयार करती हैं।

बोर्ड ने बदलाव संबंधी निर्देश संबद्ध कॉलेजों को देने के साथ ही अपनी वेबसाइट पर भी जारी कर दिए हैं। वर्ष 2014 में होने वाले बोर्ड एग्जाम में भी स्टूडेंट्स को नए फॉर्मेट के हिसाब से बैलेंस शीट तैयार करनी होगी और बाकी सवालों के जवाब देने होंगे।

कंपनियों के खाते तैयार करने में दिक्कत होने पर आईसीएआई (इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया) ने वर्ष 2012 में कंपनी की बैलेंस शीट का प्रारूप बदल दिया था।
विज्ञापन


आईसीएआई ने सभी कंपनियों को नए प्रारूप के हिसाब से ही डेटा देने के निर्देश दिए थे। आईसीएआई के निर्देश पर सभी कंपनियों ने नए फॉर्मेट के हिसाब से बैलेंस शीट तैयार करनी शुरू कर दी है।

सीआईएससीई, सीबीएसई और यूपी बोर्ड तीनों बोर्ड में कॉमर्स के स्टूडेंट्स को कंपनी की बैलेंस शीट तैयार करना और उससे संबंधित अन्य चैप्टर पढ़ाए जाते हैं।

इस तरह कंपनियों द्वारा तैयार और स्टूडेंट्स को पढ़ाए जा रहे बैलेंस शीट के फॉर्मेट में अंतर हो रहा था। इसकी वजह से कंपनी के खातों से संबंधित शेयर, डिबेंचर, रेशियो, फाइनेंशियल स्टेटमेंट आदि चैप्टर में भी डिफरेंस हो रहा था।

ऐसे में सीआईएससीई ने कॉमर्स के कोर्स में बदलाव का फैसला किया। कॉलेजों को इसकी सूचना देने के साथ ही बोर्ड ने अपनी वेबसाइट पर भी कंपनीज अधिनियम की गाइडलाइन के हिसाब से बैलेंस शीट तैयार करने का निर्देश जारी कर दिया है।

कंपनी से संबंधित खातों की पढ़ाई आईएससी बोर्ड में 12वीं कक्षा में होती है। इसलिए बदलाव को पाठ्यक्रम में लागू करने के बाद वर्ष 2014 में होने वाली परीक्षा में नए पैटर्न पर आधारित सवाल ही पूछे जाएंगे।

एसकेडी एकेडमी की अकाउंट्स की टीचर मोनिका रस्तोगी ने बताया कि नया फॉर्मेट पुराने की तुलना में बेहतर है। इसमें बैलेंस शीट केवल एक पेज में बन जाती है।

इसके बाद अकाउंटिंग नोट्स के माध्यम से केवल उन्हीं हेड का ब्यौरा देना होता जो सवाल से संबंधित हैं। जबकि पुराने फॉर्मेट में कम से कम ढाई पेज की बैलेंस शीट बनाना जरूरी था।

नए फॉर्मेट में करंट रेशियो निकालने में भी आसानी होती है क्योंकि बैलेंस शीट में चालू संपत्तियां और दायित्व अलग से दिए रहते हैं।

वहीं लखनऊ पब्लिक कॉलेजिएट के अकाउंट्स टीचर मौरिस कुमार, अकाउंट्स ने बताया कि सीबीएसई ने कंपनीज अधिनियम में हुए बदलाव की गाइडलाइन के तहत पाठ्यक्रम में पिछले वर्ष ही बदलाव कर दिया था।
विज्ञापन


स्टूडेंट्स को पिछले साल से ही नया बैलेंसशीट का नया फॉर्मेट और उसके हिसाब से अन्य चैप्टर पढ़ाए जा रहे हैं।

वहीं यूपी बोर्ड इस क्षेत्र में अब भी फिसड्डी है। क्वींस इंटर कॉलेज में अकाउंट्स के शिक्षक मनोज कुमार के अनुसार ऐसे किसी परिवर्तन की जानकारी नहीं है। फिलहाल यूपी बोर्ड में पुराने पैटर्न के हिसाब से ही पढ़ाई हो रही है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें