वर्ष 1988 में दिल्ली के गणेश नगर इलाके में महज 12 बच्चों से मेडिकल की कोचिंग शुरू करने वाला आकाश इंस्टीट्यूट आज देश में मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिले के लिए कोचिंग कराने वाला अग्रणी संस्थान बन गया है।
अब यह संस्थान मेडिकल के पीजी कोर्सेज के लिए भी कोचिंग की व्यवस्था करने वाला है। कंपनी की भविष्य की योजनाएं और अन्य मसलों पर अमर उजाला के संवाददाता शिशिर चौरसिया ने आकाश एजुकेशनल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक जे. सी. चौधरी से विस्तृत बातचीत की। पेश है इस बातचीत के अंश-
आकाश इंस्टीट्यूट की कोचिंग यात्रा कहां से शुरू होती है?
1988 में गणेश नगर में किराये के मकान में महज 12 बच्चों के साथ मेडिकल कोचिंग इंस्टीट्यूट शुरू किया था। नतीजों में हमारे 12 में से सात बच्चों का चयन दिल्ली के मेडिकल कॉलेजों में हो गया। अभी देश भर में हमारे 111 सेंटर हैं।
आपने शुरुआत मेडिकल से की, इंजीनियरिंग की तरफ झुकाव कैसे हुआ?
जब हमने कोचिंग बाजार के अर्थशास्त्र पर नजर डाली, तो पता चला कि यदि 100 बच्चे कोचिंग लेते हैं तो उनमें से 80 बच्चे इंजीनियरिंग के लिए और महज 20 बच्चे मेडिकल के लिए कोचिंग लेते हैं। इसे देखते हुए हमने इंजीनियरिंग की भी कोचिंग शुरू कर दी।
क्या आप एमबीए या अन्य कोर्स के लिए भी कोचिंग देंगे?
अभी तो हम मेडिकल और इंजीनियरिंग तक ही सीमित हैं। लेकिन अगले साल से हम मेडिकल पीजी के लिए होने वाली प्रवेश परीक्षा के लिए भी कोचिंग देने की सोच रहे हैं। उम्मीद रखिए कि वर्ष 2016 से हमारा मेडिकल पीजी एंट्रेंस कोचिंग भी शुरू हो जाएगा।
अभी आपके केंद्र कहां-कहां और कितने हैं और विस्तार की क्या योजना है?
लगभग हर राज्य में हमारे सेंटर खुल चुके हैं। फिलहाल हमारे 71 केंद्र खुद के हैं जबकि 39 केंद्र फ्रें चाइजी मॉडल पर चल रहे हैं। हमने इसी साल 11 और केंद्र खोलने की योजना बनाई है।
इस समय इंस्टीट्यूट में कितने बच्चे पढ़ रहे हैं और कंपनी का कारोबार कहां पहुंच गया है?
देशभर के केंद्रों में इस समय 1.7 लाख बच्चे पढ़ रहे हैं। हमारा कुल कारोबार लगभग 450 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।