विश्वविद्यालय और डिग्री कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों की डिग्री (उपाधि) अब दीक्षांत समारोह के चक्कर में नहीं फंसेगी। इसके लिए कुलाधिपति ने सभी कुलपतियों को निर्देश दिए हैं।
कुलपतियों से ऐसी व्यवस्था करने को कहा गया है जिससे दीक्षांत समारोह न होने या देर से होने की स्थिति में छात्रों को उनकी उपाधि मिल सके।
अब तक तभी डिग्री देने का प्रावधान रहा है जब दीक्षांत समारोह हो जाता है। बिना दीक्षांत समारोह के छात्रों को डिग्री नहीं मिल पाती है।
ऐसे में छात्रों को आगे की पढ़ाई या नौकरी के लिए डिग्री की जरूरत पड़ने पर इंतजार करना पड़ता है। कुलाधिपति बीएल जोशी ने कुलपतियों को दीक्षांत समारोह के पहले भी डिग्री देने की व्यवस्था करने को कहा है।
लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एसबी निमसे ने विदेशी छात्रों को दीक्षांत समारोह से पहले डिग्री देने के बारे में राजभवन से दिशा-निर्देश मांगे थे।
उस पत्र पर कुलाधिपति (राज्यपाल) के प्रमुख सचिव राजीव कपूर की ओर से लखनऊ विश्वविद्यालय और अन्य सभी विश्वविद्यालयों को यह निर्देश दिए गए हैं कि विदेशी छात्रों को दीक्षांत समारोह के पूर्व उनके रिजल्ट के साथ ही डिग्री (उपाधि) देने की व्यवस्था की जाए।
इसके लिए कुलपति उप्र राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 की धारा-13 (6) के तहत अपनी विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए अपने स्तर पर कार्रवाई कर सकते हैं।
कुलाधिपति ने यह भी निर्देश दिए हैं कि विदेशी छात्रों के साथ-साथ अन्य सभी छात्रों को भी पढ़ाई और नौकरी के लिए डिग्री की जरूरत पड़ सकती है।
अगर दीक्षांत समारोह न हो या देर से हो तो उन्हें डिग्री देने की व्यवस्था की जाए। यह स्थिति हर वर्ष आ सकती है। ऐसे में परिनियमावली/अध्यादेश में संशोधन कर कोई स्थायी व्यवस्था बनाई जाए ताकि छात्र अपनी डिग्री के लिए परेशान न हों।
उन्होंने उच्च शिक्षा सचिव को भी निर्देश दिए हैं कि वह शासन स्तर पर इस संबंध में विचार कर समस्या के समाधान के लिए कार्रवाई करें।