हरियाणा सरकार एक बार फिर से प्रदेश में आठवीं कक्षा में बोर्ड परीक्षा लागू करने का मन बना रही है।
इस संबंध में राज्य सरकार ने केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय को पत्र लिखा है। राज्य में शिक्षा अधिकार अधिनियम लागू होने से आठवीं तक विद्यार्थियों का सतत मूल्यांकन और फेल न करने के नियम लागू हो गए हैं। सरकार का मानना है कि इससे नौवीं और दसवीं कक्षाओं के परीक्षा परिणाम पर विपरीत प्रभाव पड़ा है।
विधानसभा में बजट सत्र के दौरान यह जानकारी सोमवार को शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल ने दी। वह इनेलो के विधायक नरेंद्र सांगवान द्वारा घरौंडा में स्कूल अपग्रेड करने और दसवीं कक्षा के परिणाम खराब आने के बारे में पूछे गए प्रश्न का उत्तर दे रही थीं।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि वह स्वयं मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा बनाई सब कमेटी की अध्यक्ष हैं। सरकार की ओर से केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को आठवीं कक्षा में बोर्ड दोबारा करवाने के संदर्भ में पत्र भी लिखा है।
चर्चा के दौरान इनेलो के अभय सिंह चौटाला ने प्रदेश के 15 स्कूलों का दसवीं का परिणाम शून्य आने पर चिंता व्यक्त की। शिक्षा मंत्री ने माना कि यह चिंता का विषय है।
दसवीं कक्षा का 0 से 20 प्रतिशत परिणाम आने पर अधिकारियों की जवाबदेही निर्धारित की गई है और दूसरे सेमेस्टर में परिणाम में बेहद सुधार हुआ है। भुक्कल ने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम एक केंद्रीय अधिनियम होने के कारण प्रदेश सरकार अपने स्तर पर कुछ नहीं कर सकती।