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'बार-बार न बदलें जॉब, खुद पर करें भरोसा'

Sun, 16 Mar 2014 08:42 AM IST
आशीष त्रिवेदी/अमर उजाला, लखनऊ
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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) लखनऊ के 28वें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि एचडीएफसी बैंक के चेयरमैन दीपक पारिख ने आईआईएम के साइड इफैक्ट बताए।
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उन्होंने डिप्लोमा लेकर कॉर्पोरेट जगत की चकाचौंध में कदम रखने वाले स्टूडेंट्स को बताया कि आईआईएम में पढ़ने के साइड इफैक्ट भी हैं और वे हमेशा उनका इम्तिहान लेते रहेंगे।

पहला यह कि कंपनी और बाहर हर व्यक्ति आपसे उम्मीद करेगा कि कोई गलती न हो, जहां आपने गलती की तुरंत टोका जाएगा कि आप तो आईआईएम से पढ़कर आए हैं।

दूसरा, पड़ोसी और मीडिया हमेशा कहेंगे कि आपकी सेलरी तो सात डिजिट में है, तीसरा आपके धैर्य की परीक्षा हमेशा होती रहेगी लेकिन आप कभी भी विचलित न हों, बल्कि अपने मजबूत आत्मविश्वास के दम पर आगे बढ़ते रहें।
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कार्यक्रम में पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम के कुल 658 स्टूडेंट्स को डिप्लोमा प्रदान किया गया। चेयरमैन गोल्ड मेडल गौरव शर्मा को, डायरेक्टर्स मेडल प्रभु प्रीतम दास को और पीजीपी चेयरमैन मेडल व रेशमा सरीन मेमोरियल मेडल फॉर बेस्ट गर्ल्स का मेडल निशा बचानी को दिया गया।

आईआईएम लखनऊ के कुल 10 मेडल में से चार छात्राओं के खाते में व छह छात्रों को मिले। मुख्य अतिथि दीपक पारिख ने तीनों साइड इफेक्ट्स का मुकाबला करने का गुरुमंत्र भी दिया।

उन्होंने कहा कि पहला साइड इफैक्ट कि आपसे गलती नहीं होगी तो इतना समझ लीजिए कि गलती किसी से भी हो सकती है और आप हमेशा सीखने की प्रक्रिया में रहेंगे तो कामयाब होंगे।

दूसरा अधिक सेलरी बढ़ने के चक्कर में बार-बार नौकरी बदलना अच्छी बात नहीं है। जहां काम करें टीम भावना में रहें और कंपनी को विश्वास में लेकर आगे बढ़ें।

तीसरा धैर्य के साथ अपने काम करें, कभी भी बिजनेस अच्छा करने के लिए करप्शन का सहारा न लें। आईआईएम के साइड इफैक्ट और उससे मुकाबला करने के तरीके जैसे ही उन्होंने बताना शुरू किया पूरा पंडाल जोश, उत्साह और उमंग से लबरेज स्टूडेंट्स ने उनका इस्तेकबाल जोरदार तालियों से किया।

पूरा दीक्षांत ग्राउंड भाषण के दौरान तालियों व हंसी-ठहाकों से गूंजता रहा। उन्होंने कहा कि अभी कुछ दिनों पहले ही अखबारों में पढ़ा कि आईआईएम लखनऊ में 100 प्रतिशत प्लेसमेंट हुआ, यह किसी भी संस्था के लिए बहुत अच्छी बात है।

उन्होंने चुटकी ली कि चलो कोई स्टूडेंट लोन डिफॉल्टर नहीं होगा, उन्होंने एजुकेशन लोन की ओर इशारा किया तो फिर पंडाल तालियों से गूंजने लगा।

उन्होंने कहा कि देश की समस्याओं के प्रति स्टूडेंट्स की जिम्मेदारी है कि वे अपने बोल्ड आइडिया के दम पर नैतिक मूल्यों को बचाए रखें। कार्यक्रम में आईआईएम लखनऊ के बोर्ड ऑफ गवर्नेंस के चेयरमैन जेजे ईरानी ने कहा कि डिप्लोमा पाने वाले स्टूडेंट अपने अभिभावकों के प्रति हमेशा कृतज्ञ रहें।

उन्होंने अफसोस जताया कि इंडिया में वेस्टर्न कंट्री की तरह इनोवेशन व एंटरप्रिन्योरशिप पर अच्छा काम नहीं हो रहा। आज भी यहां लोग रिस्क लेने से बचते हैं।

उन्होंने कहा कि टाटा संस में काम करते हुए उन्हें कुछ दिन ही हुए थे कि उस समय बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री के साथ मिलकर स्कूल खोलने, पेयजल व्यवस्था आदि के लिए काम किया लेकिन सीएम को पहले बता दिया कि वे अपने नैतिक मूल्यों से समझौता नहीं करेंगे।

उन्होंने कहा कि बिजनेस में करप्ट प्रैक्टिसेज से हमेशा बचें। जेजे ईरानी ने भी स्टूडेंट्स को सलाह दी कि वे बार-बार जॉब न बदलें, बल्कि एक कंपनी के साथ लंबे समय का रिलेशन बनाएं।

विश्व के 50 ब्यूटीफुल कैंपस में आईआईएम लखनऊ 34 वें नंबर पर
कार्यक्रम में आईआईएम लखनऊ के चेयरमैन प्रो. देवी सिंह ने पिछले एक वर्ष की प्रोग्रेस रिपोर्ट पेश की। उन्होंने कहा कि आईआईएम लखनऊ विश्व भर में 50 सबसे खूबसूरत संस्थानों की श्रेणी में 34 वें नंबर पर है।

यह इंडिया से इकलौता संस्थान है, जिसे इस सूची में शामिल किया गया है। प्रो. देवी सिंह ने बताया कि कंपनियों में कार्यरत अधिकारियों के लिए इस सत्र से शुरू किए गए डॉक्टरेट प्रोग्राम में जिन 20 लोगों ने दाखिला लिया है वे सभी टॉप कंपनियों में सीईओ हैं।

उन्होंने कहा कि इस साल तीन नए इंटरनेशनल पार्टनर इंस्टीट्यूट बनाए और अब इसकी संख्या 32 हो गई है। प्रो. देवी सिंह ने कहा कि आईआईएम लखनऊ ने रिसर्च व कंसल्टेंसी के क्षेत्र में काफी अच्छा काम किया है।

इसमें सात सीड मनी रिसर्च प्रोजेक्ट इस वर्ष मिले, इसके अलावा 19 कंसल्टेंसी प्रोजेक्ट पहले से चल रहे हैं। इसमें से 12 इस साल मिले हैं।

16 प्रोजेक्ट इस बार हमने पूरे किए। उन्होंने बताया कि स्टूडेंट्स के लिए नया अंतरराष्ट्रीय स्तर का हॉस्टल बनाया जा रहा है। इस 120 कमरे वाले हॉस्टल में अंतरराष्ट्रीय व ग्रीन बिल्डिंग के स्टैंडर्ड का पूरी तरह पालन किया गया है।

प्रो. देवी सिंह ने कहा कि आईआईएम लखनऊ के नोएडा कैंपस में 30 हजार वर्ग फीट में हो रहे निर्माण कार्य का दूसरा चरण पूरा हो जाएगा।

यहां स्टूडेंट्स को अत्याधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। इसमें दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में पांच बड़े हॉल इसमें हैं। प्रत्येक में 1400 लोग बैठ सकते हें। रेन वॉटर हार्वेस्टिंग का भी यहां पूरा ख्याल रखा गया है।
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