जी हां, बैंक अब आपको लोन देने से पहले आपके बारे में जानेंगे। अगर इन बातों पर आप खरे उतरे तभी मिलेगा कर्ज।
डूबते कर्ज से परेशान बैंकर कर्ज देने की प्रक्रिया को सख्त बनाने की तैयारी में हैं। इसके तहत बैंक कर्मचारियों द्वारा ग्राहकों की छोटी-छोटी गलतियों को नजरअंदाज करने के रवैये को भी बदलने की तैयारी है। अप्रैल से शुरू होने वाले नए वित्त वर्ष के लिए नई रणनीति बनाने की कवायद में सबसे ज्यादा बैंक इसी बात को तरजीह दे रहे हैं।
बैंकों का जून 2013 तक सकल एनपीए (गैर निष्पादित परिसंत्तियां) 1.92 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। इसी तरह बैंकों के पास अकेले कॉरपोरेट से कर्ज रिस्ट्रक्चरिंग की मांग दिसंबर 2013 तक एक लाख करोड़ रुपये को भी पार कर चुकी है।
भारतीय स्टेट बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार हर साल बैंक नए वित्त वर्ष के लिए अपनी योजना का खाका तैयार करते हैं। जिसमें इस बात पर जोर रहता है कि कैसे कम जोखिम के साथ ज्यादा कारोबार बढ़ाए जाए। जहां तक अप्रैल से शुरू होने वाले नए वित्त वर्ष की बात है, तो बीता साल बैंकिंग इंडस्ट्री के लिए बहुत अच्छा नहीं रहा है। ऐसे में बैंकों का सबसे ज्यादा जोर इस बात पर ही है कि नए कर्ज देने में लापरवाही न हो। ग्राहकों का प्रोफाइल अच्छी तरह जांचा जाए।
इंडियन बैंक के अधिकारी ने बताया कि कॉरपोरेट सेक्टर के साथ-साथ रिटेल सेक्टर में भी कर्ज डूबे हैं। ऐसे में हम इस बात पर जोर दे रहे हैं कि कर्ज देने में ग्राहक की पूरी जांच की जाए। कई बार बैंक ग्राहक द्वारा क्रेडिट कार्ड के सेटलमेंट आदि के रिकार्ड को कर्ज देने में नजर अंदाज करते हैं। कई ग्राहकों के चेक बार-बार बाउंस होते हैं। ऐसी बातों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
पंजाब नेशनल बैंक के अधिकारी ने बताया कि पिछले साल बैंकों ने जानबूझ कर कर्ज न चुकाने वाले ग्राहकों की सूची जारी की थी। कई डिफॉल्टरों के नाम और तस्वीर भी अखबारों में जारी की गई। डिफॉल्ट करने वाले ग्राहक कई बार दूसरे बैंकों से कर्ज लेने की कोशिश करते है। जिसमें वह कई बार सफल हो जाते हैं। इस मैकेनिज्म को भी मजबूत करने की कवायद की जा रही है।