प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के पहले बजट की तैयारी में जुटे वित्त मंत्री अरुण जेटली और उनके अधिकारियों की टीम के समक्ष गंभीर दुविधा की स्थिति पैदा हो गई है। इस बार बजट तैयार करने वाली टीम को योजना आयोग का सहयोग और सकल बजटीय सहायता को लेकर आयोग से जरूरी जानकारियां नहीं मिलने वाली है।
सकल बजटीय सहायता आम बजट का एक सबसे अहम हिस्सा होता है, जिसके जरिए विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के लिए बजटीय योजनागत आवंटन किया जाता है। बजट तैयार करने में योजना आयोग वर्षों से वित्त मंत्रालय को बेहद अहम और जरूरी जानकारियां देता रहा है जिसके आधार पर बजट में मंत्रालयों के हिसाब से आवंटन और बजटीय सहायता में कमी या बढ़ोतरी की जाती है।
यूपीए सरकार के आंकड़ो पर ही भरोसा
केंद्रीय योजनाओं को दिया जाने वाला सरकारी सहयोग सकल बजटीय सहायता कहलाता है। वैसे लगता है कि मोदी सरकार में योजना आयोग के ढांचे में बदलाव किया जा सकता है।
सरकार ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए राव इंद्रजीत सिंह को योजना राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नियुक्त किया है। अब नई सरकार को बजट बनाने में यूपीए सरकार के आंकड़ों पर ही भरोसा करना होगा।
योजना आयोग के एक पूर्व सदस्य ने कहा कि नए वित्त मंत्री को या तो पुराने आंकड़ों पर भरोसा करना होगा या फिर वह विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के लिए केंद्रीय कोष आवंटित करने में मौजूदा आंकड़ों में थोड़ा बहुत बदलाव करेंगे। यह काम योजना आयोग का था लेकिन अब इसे तात्कालिक तरीके से किया जाएगा।
आयोग के सभी सदस्य दे चुके हैं इस्तीफा
यूपीए सरकार में योजना आयोग के उपाध्यक्ष रहे मोंटेक सिंह अहलूवालिया के नेतृत्व वाले आयोग की टीम के सभी सदस्य केंद्र में निजाम बदलने के बाद इस्तीफा दे चुके हैं। अभी तक सरकार ने आयोग के पुनर्गठन को लेकर कदम नहीं बढ़ाया है। माना जा रहा है कि मोदी सरकार आयोग के ढांचे में व्यापक बदलाव कर सकती है।
अहम होती है योजना आयोग की भूमिका
हाल के वर्षों में सकल बजटीय सहायता कुल केंद्रीय योजना का 50 फीसदी से अधिक है। योजना आयोग विभिन्न मंत्रालयों की मांग को एकीकृत कर वित्त मंत्रालय को भेजता है। इसके बाद वित्त मंत्रालय मांगों की जांच कर उसे मंजूरी देता है। अभी तक केंद्रीय मंत्रालय अपनी विकास योजनाओं संबंधी मांग पत्र को आयोग के सामने पेश करते रहे हैं लेकिन अब उन्हें सीधे वित्त मंत्रालय से बात करनी होगी।