देश की प्रमुख आईटी सर्विसेज कंपनी विप्रो ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से अमेरिका के प्रस्तावित अप्रवास बिल के उन प्रावधानों को हटवाने में मदद मांगी है, जो भारतीय आईटी कंपनियों के खिलाफ माने जा रहे हैं।
विप्रो के चेयरमैन अजीम प्रेमजी ने प्रधानमंत्री को लिखी एक चिट्ठी में कहा है अमेरिकी अप्रवास नीति से जुड़े बिल के प्रावधान भेदभावपूर्ण हैं और इनमें भारतीय कंपनियों को निशाना बनाया गया है।
बिल में आउटप्लेसमेंट पर रोक लगा दी गई है। और भी कई प्रतिबंध शामिल किए गए हैं, जो अमेरिकी कर्मचारियों की भर्ती को प्रमाणित करने से लेकर उनके और एच1बी वीजा कर्मचारियों के वेतन के मामलों से जुड़े है।
प्रेमजी ने प्रधानमंत्री से कहा है कि वह बिल से भारतीय आईटी कंपनियों से जुड़े भेदभावपूर्ण प्रावधान हटवाने में व्हाइट हाउस पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करें। बिल के प्रावधान ऐसे हों जिनसे अमेरिकी और भारतीय आईटी कंपनियों को समान धरातल पर रखा जाए।
प्रेमजी ने अपनी चिट्ठी में कहा है कि इमिग्रेशन बिल से भारतीय आईटी कंपनियों के हितों को नुकसान पहुंचाने वाले प्रावधान हटाना भारत और अमेरिका के आपसी कारोबार के लिए अच्छा साबित होगा।
यह प्रधानमंत्री के उस लक्ष्य के मुफीद होगा, जिसके मुताबिक दोनों देशों के बीच 100 अरब डॉलर के मौजूदा कारोबार को बढ़ा कर पांच गुना तक ले जाना है।
गौरतलब है कि अमेरिकी सीनेट में जून में पारित इमिग्रेशन बिल में एच1बी-वीजा पर बेहद कड़ा प्रावधान शामिल किया गया है। इससे आईटी कंपनियों के लिए इस वीजा पर कर्मचारियों को अमेरिका भेजना महंगा हो जाएगा।
पहले से दबाव झेल रही भारतीय आईटी कंपनियों के लिए यह बड़ी मुसीबत पैदा करेगा और इससे अमेरिका में कारोबार कर रही इस सेक्टर की कंपनियों के मुनाफे पर चोट पहुंचेगी।
भारतीय आईटी कंपनियों ने अमेरिका में पिछले पांच साल के दौरान 35,000 नौकरियां पैदा की हैं और 2,80,000 नौकरियों को सपोर्ट किया है।