योजना आयोग, मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति (पीएमईएसी) की किसी भूमिका के बगैर संभवत: पहली बार तैयार हो रहे आम बजट को अंतिम रूप देने का काम जारी है।
इसके लिए नॉर्थ ब्लॉक स्थित वित्त मंत्रालय को सील कर दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार 10 जुलाई को आम बजट पेश करेगी। 26 मई को कार्यभार संभालने के बाद मोदी सरकार अब तक योजना आयोग का पुनर्गठन नहीं कर पाई है।
उसने न तो मुख्य आर्थिक सलाहकार और न ही पीएम की आर्थिक सलाहकार समिति का ही गठन किया है। पूर्व की यूपीए सरकार में रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर सी रंगराजन पीएमईएसी के प्रमुख थे।
अब तक बजट तैयार करने में सीईए और पीएमईएसी की सलाह को अहमियत मिलती रही है। इन्हें सरकार की नई नीतियों और कार्यक्रमों का जन्मदाता माना जाता है।
पीएम मोदी ने नहीं किया योजना आयोग का गठन
दूसरी तरफ योजना आयोग का अब तक पुनर्गठन नहीं होने के कारण आज की तारीख में वह निष्क्रिय हो गया है। सरकार के भीतर अब भी नए योजना आयोग की भूमिका को लेकर बहस चल रही है।
योजना आयोग की सलाह के अभाव में वित्त मंत्रालय ने विभिन्न मंत्रालयों से सीधे उनकी मांगों और नई नीतियों के बारे में जानकारी मांगी है, जिनकी बजट में घोषणा की जानी है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह बेहद विचित्र और दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि सरकार को सीईए, योजना आयोग और पीएमईएसी की राय नहीं मिल रही है। ऐसा संभवत: पहली बार हो रहा है और इसका असर बजट में दिख सकता है।
मोदी सरकार बजट को लेकर सतर्क
इस बीच वित्त मंत्रालय ने 10 जुलाई को बजट पेश किए जाने तक नॉर्थ ब्लॉक को बाहरी लोगों, लॉबिंग करने वालों, उद्योगपतियों और मीडिया के लिए सील कर दिया है।
मंत्रालय के बेसमेंट में बजट की प्रतियों की प्रिंटिंग की तैयारी को देखते हुए तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गई है। पहले स्तर में दिल्ली पुलिस और दूसरे स्तर में सीआरपीएफ सुरक्षा मुहैया करवा रही है।
खुफिया ब्यूरो तीसरे स्तर की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रही है। माना जा रहा है कि बजट तैयार करने में जुटे कुछ अधिकारियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए उन्हें रेडियो फ्रीक्वेंसी स्कैंड कार्ड दिए गए हैं।
इस काम में लगी 250 वरिष्ठ और जूनियर अधिकारियों की टीम 10 जुलाई के बाद ही बाहरी लोगों से संपर्क कर पाएगी। इस साल बजट के कागजों को बांधने के लिए मैनुअल प्रक्रिया अपनाई गई है।