केंद्र सरकार द्वारा गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में 65 रुपये की बढ़ोतरी को किसान संगठनों ने नाकाफी बताया है। संगठनों का कहना है कि इससे किसानों को उपज की लागत निकालना भी मुश्किल हो जाएगा, जिस कारण उन्हें भारी नुकसान उठना पड़ सकता है। सरकार ने चालू रबी सीजन के लिए गेहूं के एमएसपी को 65 रुपये बढ़ाकर 1,350 रुपये प्रति क्विंटल करने की घोषणा की है। इसके साथ ही सरकार ने बंपर स्टॉक को देखते हुए 25 लाख टन गेहूं निर्यात को भी मंजूरी दे दी है।
ऑल इंडिया किसान सभा (एआईकेएस) के प्रेसिडेंट एस. रामाचंद्रन पिल्लई ने गेहूं के एमएसपी में 65 रुपये की बढ़ोतरी को नाकाफी बताया है। उन्होंने कहा कि उपज की इनपुट कॉस्ट में हुई बढ़ोतरी को देखते हुए हमने गेहूं का एमएसपी न्यूनतम 1,800 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की थी। जबकि, राज्यों ने न्यूनतम एमएसपी 1,868 रुपये प्रति क्विंटल करने की सिफारिश की थी। इसके बावजूद, आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी (सीसीईए) ने पिछले साल के मुकाबले रबी सीजन के लिए गेहूं की एमएसपी में महज 5 फीसदी की बढ़ोतरी की है।
जबकि इस दौरान खाद की कीमतें करीब 50 फीसदी, डीजल की कीमतें 45 फीसदी से अधिक और मजदूरी करीब 20 फीसदी तक बढ़ चुकी है। एमएसपी निर्धारित करते समय सरकार ने इन सब बातों का ध्यान नहीं रखा, जिसका किसानों का भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। एमएसपी में बढ़ोतरी नहीं की गई तो आने वाले दिनों में किसान गेहूं की उपज कम कर सकते हैं। इस साल के आंकड़े पर नजर डालें तो अब तक 2.53 करोड़ हेक्टेयर गेहूं की बुवाई हुई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 2.57 करोड़ हेक्टेयर था।
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के संयोजक वीएम सिंह ने बताया कि सरकार ने गेहूं के एमएसपी में 65 रुपये की बढ़ोतरी करके किसानों के साथ मजाक किया है। इन भावों पर किसानों को अपनी लागत भी वापस नहीं मिलेगी। उन्होंने बताया कि जिन लोगों को खेत-खलिहान की जानकारी नहीं है, वह लोग किसानों की तकदीर का फैसला कर रहे हैं। कृषि मंत्री शरद पवार ने संसद में खुद स्वीकार किया है कि इस वर्ष खाद, बिजली, डीजल, सिंचाई और बीज के दामों में बढ़ोतरी हुई है। इससे फसलों की लागत बढ़ेगी। इसके बावजूद एमएसपी तय करते समय सरकार ने इनपुट कास्ट को नजरअंदाज किया है।
भाजपा किसान मोर्चा के महासचिव नरेश सिरोही ने गेहूं के एमएसपी में बढ़ोतरी को नाकाफी बताते हुए कहा कि सरकार के इस फैसले से किसान एक बार फिर कर्ज के बोझ में दब सकते हैं। जिस तरह से बीज, खाद और डीजल के दामों में बढ़ोतरी हुई है। उसके आधार पर गेहूं का समर्थन मूल्य 1,400 रुपये क्विंटल से कम नहीं होना चाहिए। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने किसान मोर्चा को लाभकारी मूल्य दिलाने का भरोसा दिया था लेकिन मौजूदा निर्णय से किसानों का भरोसा ही टूट गया है। किसान जागृति मंच के सुधीर पवार का कहना है कि किसानों को उम्मीद थी कि कम से कम 100 रुपये क्विंटल की बढ़ोतरी जरूर होगी लेकिन उम्मीद के विपरीत सरकार ने सिर्फ 65 रुपये की बढ़ोतरी करके किसानों को ठेंगा दिखा दिया है।