यूपीए सरकार के गेमचेंजर भूमि अधिग्रहण कानून के प्रावधानों में बदलाव के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कोशिशें तेज कर दी हैं।
ग्रामीण विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी भी संभाल रहे गडकरी को इस मुद्दे पर भाजपा शासित राज्यों का साथ भी मिल गया है।
शुक्रवार को राज्यों के राजस्व मंत्रियों की बैठक में कई भाजपा शासित राज्यों ने इस कानून की कड़ी आलोचना करते हुए इसमें सुधार मांग उठाई।
हाईवे परियोजनाओं की राह आसान बनाने के लिए गडकरी भूमि अधिग्रहण कानून के कुछ प्रावधानों में संशोधन का बिगुल बजा चुके हैं।
राजस्व मंत्रियों की बैठक के बाद गडकरी ने कहा कि मुआवजे, पुनर्वास और पुर्नस्थापना से जुड़े प्रावधानों में कोई फेरबदल नहीं किया जाएगा। सरकार किसानों केहितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
लेकिन राज्यों की आपत्तियों पर गौर किया जाएगा। इस मामले पर अगले 10 दिन के भीतर एक रिपोर्ट तैयार कर प्रधानमंत्री को सौंपी जाएगी।
माना जा रहा है कि इस रिपोर्ट के आधार पर ही भूमि अधिग्रहण कानून के प्रावधानों में बदलाव की तस्वीर साफ होगी। उद्योग जगत भी इस कानून से खुश नहीं है।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि सड़क परियोजनाओं में भू-स्वामियों को जमीन के बदले जमीन व मुआवजे से जुड़े प्रावधानों में खासतौर पर बदलाव किए जा सकते हैं।
भाजपा शासित राज्यों खासकर गोवा, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश ने नए भूमि अधिग्रहण कानून के कई प्रावधानों का कड़ा विरोध किया है।
इनका कहना है कि चुनाव को देखते हुए यूपीए सरकार ने जल्दबाजी में यह कानून बनाया। जिससे विकास परियोजनाओं की दिक्कतें बढ़ गई है।