शराब और खनन के कारोबार में एक छत्र राज करने के बाद पोंटी का उत्तराखंड में हाइड्रो पावर व हाउसिंग में हाथ आजमाने का ख्वाब पूरा नहीं हुआ। लेकिन खास बात ये है कि ऑफ द रिकॉर्ड जितना पैसा पोंटी चड्ढा का उत्तराखंड में लगा है, उतना ही राज्य के कुछ धन कुबेरों ने भी पोंटी के साम्राज्य में निवेश कर रखा था। लेकिन बेनामी।
जानकारों की माने तो राज्य में गोला नदीं से सालाना लगभग 500 करोड़ रुपये का खनन कारोबार होता है। यह क्षेत्र अभी भी पोंटी के कब्जे में बताया जाता है। इसके अलावा लॉटरी सिस्टम होने के बावजूद अभी भी शराब का एक चौथाई कारोबार पोंटी की जेब से चलता है।
रियल एस्टेट और होटल सेक्टर में बड़ा दखल पोंटी का था। यह बड़ा सवाल है कि अब कारोबार की इस रियासत को कौन संभालेगा? उत्तराखंड में अलग-अलग नाम से कारोबार करने वाली ऐसी आधा दर्जन कंपनियां हैं जिसमें पोंटी का पैसा लगा है। अब यह पैसा कैसे वापस होगा।
इसी तरह राज्य के कई राजनेताओं से लेकर ब्यूरोक्रेट्स और धनकुबेरों का बेनामी धन पोंटी की कंपनी में लगा है। अब उनके लिए भी निवेश वापसी की राह मुश्किल होगी। उत्तराखंड के हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट के लिए पोंटी अरसे से सक्रिय था। पिछली सरकार में आवंटन निरस्त होने से उसकी हसरत मन में ही रह गई थी। अब उसने फिर कोशिश शुरू कर दी थी।
अपनों ने कई बार चलाए खंजर
पिछले ढाई दशक से कारोबार बढ़ाने में लगे पोंटी की पीठ पर उसके अपनों ने ही कई बार खंजर चलाए थे। दस साल पहले पहली बार पंजाब में उसके नजदीकी रिश्तेदार ने शराब के कारोबार में कई करोड़ की चपत लगाई। इसी तरह उत्तराखंड और यूपी में भी उसके दो सिपहसालारों ने दगा दिया। लेकिन पोंटी ने प्रतिशोध लेने की बजाय अलग होना मुनासिब समझा।