कार, स्कूटर से चलने वाली आम जनता के लिए राहत की कोई उम्मीद नहीं दिखती। पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े अभी हफ्ता भर भी नहीं गुजरा है कि एक बार फिर इनकी कीमतों में उछाल आने की आशंका बढ़ गई है।
दरअसल, डॉलर की तुलना में रुपए के लगातार दुबला होने के कारण ऐसा हो सकता है। स्थानीय और विदेशी बाजारों में कमजोरी के कारण गुरुवार को कारोबार के शुरुआती सत्र में रुपया बुरी तरह पिटा। यह 28 जून, 2012 के बाद पहली बार 57 का स्तर तोड़ गया।
सुबह पौने दस बजे आंशिक रूप से कंवर्टिबल रुपया कल के 56.72 की तुलना में आज 56.99 पर कारोबार कर रहा था। यह इससे भी नीचे जा सकता था, लेकिन निर्यातकों ने अमेरिकी मुद्रा की बिकवाली कर इस गिरावट को कुछ थामा।
हफ्ते भर पहले पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने के वक्त पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री वीरप्पा मोइली ने कहा था कि रुपए में गिरावट की वजह से तेल आयात महंगा हो गया है और अगर कीमतें नहीं बढ़ाई जातीं, तो तेल कंपनियों का नुकसान काफी बढ़ जाएगा।
उन्होंने कहा था, 'आपको यह पता होना चाहिए कि डॉलर की तुलना में हर रुपए की गिरावट से 9,000 करोड़ रुपए का भार पड़ता है। यह पैसा कहां से आएगा। हम पैसा बना तो नहीं सकते। किसी न किसी संसाधन से जुटाना ही होगा।'
ऐसे में रुपए की रिकॉर्ड गिरावट ने एक बार फिर यह डर पैदा कर दिया है कि तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल के दामों में इजाफा कर सकती हैं।