सरकार की ओर से आर्थिक सुधार की दिशा में उठाए गए कदमों का ठोस असर दिखना भले ही अभी शुरू नहीं हो पाया हो, पर ग्लोबल स्तर पर इसने देश की अर्थव्यवस्था के बारे में अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की धारणा को सकारात्मक दिशा में मोड़ना शुरू कर दिया है। भारत के मौजूदा आर्थिक और वित्तीय हालात का विश्लेषण करते हुए विश्व बैंक अपनी एक रिपोर्ट में भारत के बारे में कुछ ऐसी ही सकारात्मक राय व्यक्त की है। रिपोर्ट में उम्मीद जताई गई है कि भारत की आर्थिक वृद्धि दर निकट भविष्य में चीन के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर के आसपास पहुंच सकती है।
विश्व बैंक की ओर से जारी ग्लोबल आर्थिक परिदृश्य 2013 के नवीनतम संस्करण में भारत, चीन और ब्राजील जैसे विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाओं के पटरी पर लौटने और तेज वृद्धि दर हासिल करने की उम्मीद जताई गई है। विश्व बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री कौशिक बसु ने बताया कि विश्व बैंक को उम्मीद है कि वर्ष 2015 तक चीन की वृद्धि दर 7.9 प्रतिशत होगी, जबकि भारत की वृद्धि दर 7 प्रतिशत होगी। उन्होंने कहा कि आर्थिक वृद्धि दर के मामले में दोनों एशियाई देशों के बीच अंतर घट रहा है। बसु ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि हमारा अनुमान है कि भारत की आर्थिक वृद्धि दर 2012 के 5.1 फीसदी से बढ़कर 2013 में 6.1 पर पहुंच जाएगी।
रिपोर्ट में विश्व अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 2013 में बढ़कर 2.4 प्रतिशत रहने की संभावना जताई गई है, जो 2012 में 2.3 प्रतिशत रही। रिपोर्ट के मुताबिक अधिक आय वाले देशों की वृद्धि दर 2012 और 2013 में 1.3 प्रतिशत रहेगी, जबकि भारत, चीन और ब्राजील जैसे उभरते बाजारों में सुधार के व्यापक संकेत देखने को मिलेंगे। रिपोर्ट के मुताबिक 2012 में ब्राजील की वृद्धि दर में 0.9 प्रतिशत की तेजी देखी गई। इस आधार पर विश्व बैंक ने 2013 में ब्राजील की आर्थिक विकास दर 3.4 प्रतिशत रहने की उम्मीद जताई है। वहीं चीन की वृद्धि दर 2013 में सुधर कर 8.4 प्रतिशत रहने की संभावना है, जो 2012 में 7.9 प्रतिशत रही।