उत्तराखंड के पंत विश्वविद्यालय के प्रोडक्शन इंजीनियरिंग विभाग ने एक ऐसी वाशिंग मशीन डिजाइन की है, जिसे बिना बिजली के चलाया जा सकता है। इसे मैनुअली ड्रिवन पैडल पॉवर्ड वाशिंग मशीन नाम दिया गया है।
मशीन पर्यावरण के अनुरूप है। यह शारीरिक व्यायाम के लिए भी उपयोगी है। इसमें एक साथ कई कपड़ों की सामान्य से अच्छी धुलाई की जा सकती है। यह डिजाइन बाजार में उपलब्ध हॉरीजेंटल अर्थात क्षैतिज अक्षीय वॉशर के समरूप है।
भीतरी ड्रम जिसमें कपड़ों को रखा जाता है, प्लास्टिक के युटिलिटी टब से निर्मित है। भीतरी ड्रम छिद्रयुक्त होता है, ताकि ड्रम कपड़ों से पानी को निचोड़ सके। गीले कपड़ों को निचोड़ने की अधिकतम क्षमता 40 प्रतिशत है। इसके भीतरी ड्रम में तीन त्रिभुजाकार पत्तियां लगी हुई हैं, जो कपड़ों को धुलाई के दौरान घुमाती रहती हैं।
मुख्य संरचना एक साधारण ट्यूब फ्रेम से जुड़ी हुई है, जो कि साइकिल के फ्रेम से बनी हुई है। भीतरी ड्रम एक पैडल सॉफ्ट से जुड़ा हुआ है, इस पैडल सॉफ्ट के विपरीत एक गियर सिस्टम लगा हुआ है, जिससे ड्रम को घुमाया जाता है। गियर को पैडल से जोड़ने के लिए चैन का उपयोग किया गया है।
ऑपरेटर कपड़ों को बाहरी बैरल में बने कट आउट से निकाल एवं डाल सकता है। गंदे पानी को बाहर निकालने के लिए बैरल के निचले हिस्से में एक वॉल्व लगा हुआ है। लगभग तीन किलो वजन के सूखे कपड़े धोने के लिए 35 लीटर पानी और डिटर्जेंट की सामान्य मात्रा का उपयोग करते हुए 30 मिनट का समय लगता है।
प्रोडक्शन इंजीनियरिंग के विभागाध्यक्ष डॉ. आरएस जादौन ने बताया मशीन मैदानी और पर्वतीय क्षेत्रों के दूरस्थ एवं विद्युत सुविधा से वंचित क्षेत्रों को ध्यान में रखकर डिजाइन की गई है। बाजार में लाने पर इसकी अनुमानित लागत लगभग सात हजार रुपये आएगी।
इंजीनियर कॉलेज के डीन डॉ. एचसी शर्मा ने बताया मशीन को कामर्शियल मोड में तैयार कराने के लिए परियोजना तैयार की जाएगी। परियोजना राज्य सरकार को उपलब्ध कराई जाएगी। राज्य सरकार के सहयोग से इसे किसानों एवं विद्युत से वंचित ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाया जाएगा।