उत्तराखंड, हिमाचल और उत्तर प्रदेश सहित उत्तर भारत के कई राज्यों में बाढ़ का प्रकोप जारी है। ऐसे में जान-माल की क्षति के अलावा घरों और वाहनों को भी काफी नुकसान पहुंचा है।
वाहनों और घरों के लिए बीमा कंपनियों से क्लेम लेकर नुकसान की कुछ हद तक भरपाई की जा सकती है। प्राकृतिक विपदा की इस घड़ी में कंपनियां भी क्लेम प्रक्रिया को जल्द निपटाने और सरल करने का दावा कर रही हैं।
आईसीआईसीआई लोम्बार्ड के चीफ (अंडरराइटिंग एंड क्लेम) संजय दत्ता ने अमर उजाला को बताया कि प्राकृतिक आपदा की इस घड़ी में हमारी कोशिश यह रहेगी कि वाहनों पर क्लेम देने की प्रक्रिया ज्यादा तेज और आसान कर दी जाय। इसके तहत हम कम दस्तावेज और प्रमाणीकरण पर जोर देंगे।
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बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के चीफ टेक्निकल ऑफीसर विजय कुमार ने कहा कि बाढ़ में क्षतिग्रस्त मोटर बीमा पर क्लेम सामान्य क्लेम की तरह ही ग्राहकों को मिलेगा।
हालांकि, इसमें यह बात बेहद ध्यान देने की है, ग्राहक डूबी हुई गाड़ी को किसी भी तरह स्टार्ट न करें। ऐसी कोशिश से इंजन खराब हो जाता है, जो कि क्लेम का हिस्सा नहीं होगा।
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भारती एक्सा जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के सीईओ और एमडी अमरनाथ अनंत नारायण के अनुसार बाढ़ में क्षतिग्रस्त गाड़ियों पर सामान्य मोटर इंश्योरेंस के क्लेम प्रक्रिया के तहत ही क्लेम मिलता है।
यदि ग्राहक ऐसी आपदाओं के लिए कुछ बातों का पहले से ध्यान रखे तो उसे काफी लाभ मिल सकता है। मसलन रिटर्न टू इनवॉयस प्राइस कवर के जरिए पूरी तरह से क्षतिग्रस्त गाड़ी पर ग्राहक, गाड़ी की खरीदी गई कीमत तक क्लेम ले सकता है।
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मैग्मा एचडीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के सीईओ स्वराज कृष्णन के मुताबिक, घरों को आपदा से हुए नुकसान के लिए अलग से बीमा कराना होता है। जिसमें फायर पॉलिसी प्रमुख होती है।
इसमें ग्राहक बाढ़, भूकंप से भी कवर प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा पॉलिसी के तहत घरों के अंदर रखे सामान का भी बीमा कराया जा सकता है।
किन बातों का रखें ध्यान:
1-डूबी और क्षतिग्रस्त गाड़ी को किसी भी तरह स्टार्ट न करें, इंजन खराब होने पर उसका क्लेम नहीं मिलेगा।
2-गाड़ी के बहने और न मिलने के सुबूत अपने पास रखने की कोशिश करें।
3-आपदा से क्षतिग्रस्त गाड़ी के प्रमाण के लिए फोटो आदि को भी तैयार रखें।
4-घरों के लिए प्राकृतिक आपदा से सुरक्षा पर बीमा पहले से कराना होता है।