अमेरिका का कहना है कि वह भारत के उस कदम पर नजरें लगाए हुए है, जिसमें वह रिटेल में एफडीआई की तरह बीमा सेक्टर में भी विदेशी निवेश का दायरा बढ़ाएगा। वर्ल्ड इकोनामिक फोरम में अमेरिका की राजदूत नैंसी जे पॉवेल ने कहा कि हम भारत में विदेशी निवेश के विस्तार की ओर देख रहे हैं, खासकर बीमा में एफडीआई का विस्तार अहम है। नैंसी भारत की ओर से हाल में उठाए गए आर्थिक सुधार के कदमों पर अमेरिका की प्रतिक्रिया व्यक्त कर रही थीं।
बीमा सेक्टर में एफडीआई की सीमा 26 से बढ़ाकर 49 फीसदी किए जाने का विधेयक 2008 से राज्यसभा में लंबित था। पिछले महीने कैबिनेट ने बीमा में विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाने के फैसले के साथ इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया है। सितंबर में भारत ने मल्टी ब्रांड रिटेल सेक्टर में 51 फीसदी विदेशी निवेश को अनुमति दी। घरेलू एयरलाइंस में विदेशी विमानन कंपनियों को भी 49 फीसदी तक निवेश करने को मंजूरी दी।
भारत सरकार के इन कदमों पर पावेल ने कहा कि इन कदमों का जल्द से जल्द प्रभावी होना बहुत महत्वपूर्ण है। इसमें मल्टी ब्रांड रिटेल पर राज्य सरकारों की ओर से निर्णय बेहद अहम है। उन्होंने कहा कि यह कंपनियों पर निर्भर करेगा कि वह भारत सरकार के इन फैसलों पर क्या कदम उठाती हैं, लेकिन भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी कारोबार को बहुत व्यापक बना रही हैं।
पॉवेल ने कहा कि अमेरिकी कारोबारी भारतीय बाजार में संभावनाओं से खासे प्रभावित हैं। निश्चित रूप से भारत बहुत बड़ा बाजार है। अमेरिकी कंपनियों को इसका लाभ उठाना चाहिए।