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डब्ल्यूटीओ में बीच का रास्ता निकालने की कोशिश

Thu, 31 Jul 2014 09:25 PM IST
अजीत सिंह / अमर उजाला दिल्ली
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विश्व व्यापार की राह आसान वाले डब्ल्यूटीओ के समझौते की समय-सीमा समाप्त होने से कुछ घंटे पहले अमेरिका ने इस मसले पर सहमति बनने की उम्मीद जताई है।
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भारत की यात्रा पर आए अमेरिका के विदेश मंत्री जॉन कैरी ने बृहस्पतिवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली से मुलाकात में भी डब्ल्यूटीओ का मुद्दा उठाया है। हालांकि, वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने दावा किया है कि भारत डब्ल्यूटीओ में अपना रुख नहीं बदलेगा। लेकिन डब्ल्यूटीओ में भारत को मनाने की डब्ल्यूटीओ और अमेरिका की कोशिशों को देखते हुए इस मसले पर बीच का रास्ता निकलने की उम्मीद की जा रही है।

जिनेवा में बृहस्पतिवार रात तक डब्ल्यूटीओ के व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया जाना है। लेकिन आखिरी समय में भारत के कदम वापस खींच लेने से यह समझौता खटाई में पड़ सकता है। भारत की मांग है कि व्यापार सुगमता समझौते के साथ-साथ भारत की खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के स्थायी समाधान की दिशा में ठोस प्रगति होनी चाहिए।
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अभी डब्ल्यूटीओ के नियमों के तहत कुल खाद्यान्न उत्पादन के अधिकतम 10 फीसदी कीमत के बराबर कृषि सब्सिडी देने की छूट है। लेकिन इसकी गणना 1986-87 की कीमतों के आधार पर की जाती है। भारत कृषि सब्सिडी के नियमों और गणना के तरीके में बदलाव चाहता है।

अमेरिकी विदेशी मंत्री जॉन कैरी के साथ भारत के दौरे पर आई यूएस कॉमर्स सेक्रेटरी पेन्नी प्रीत्जकर ने तय अवधि के भीतर डब्ल्यूटीओ में सहमति बनने की उम्मीद जताई है। समझौते की तय समय सीमा समाप्त होने के कुछ घंटे पहले अमेरिकी की ओर से आए इस आशाजनक बयान से डब्ल्यूटीओ में बीच का रास्ता निकलने के आसार बढ़ गए हैं। हालांकि, वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रीत्जकर से मुलाकात के दौरान बाली समझौते पर बातचीत से इनकार किया है।
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सीतारमण ने दावा किया है कि डब्ल्यूटीओ में भारत अपने रुख पर कायम है। वाणिज्य सचिव राजीव खेर ने संकेत दिया है कि डब्ल्यूटीओ में जारी गतिरोध को दूर करने के लिए भारत की ओर से विकल्प सुझाए गए हैं। उधर, जिनेवा में डब्ल्यूटीओ के मध्यस्थ भारत के वार्ताकारों के साथ मिलकर समाधान निकालने में जुटे हैं। भारत के बगैर व्यापार समझौते पर आगे बढऩे के विकल्प पर भी विचार चल रहा है, लेकिन ऐसी सूरत में डब्ल्यूटीओ की पूरी मुहिम को झटका लगेगा।
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