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बारहवीं योजना में चार फीसदी कृषि विकास दर मुमकिन: प्रणब

Tue, 15 Jan 2013 10:07 PM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
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बारहवीं पंचवर्षीय योजना में कृषि विकास दर को चार फीसदी के स्तर तक ले जाना चुनौती पूर्ण जरूर है लेकिन, नामुमकिन नहीं। बेहतर बीज, जल प्रबंधन व्यवस्था में सुधार और उर्वरक व कीटनाशकों के संतुलित इस्तेमाल से यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। यह बात मंगलवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कृषि क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को कृषि कर्मण पुरस्कार से पुरस्कृत करते हुए कही। वर्ष 2011-12 में सर्वाधिक अनाज उत्पादन के लिए मध्य प्रदेश और पंजाब को पुरस्कृत किया। उत्तर प्रदेश को मोटे अनाज, बिहार को चावल और हरियाणा व हिमाचल को सर्वाधिक गेहूं उत्पादन के लिए कृषि कर्मण पुरस्कार दिया गया।
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मुखर्जी ने कहा कि कृषि क्षेत्र को बिजली, ऋण, जल और उर्वरकों तक पहुंच में प्राथमिकता दिए जाने की जरूरत है। यह क्षेत्र चुनौतियों से भरा है, इसलिए रोजी रोटी के लिए खेती पर ग्रामीण परिवारों की निर्भरता घटाने के लिए अन्य क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों का सृजन किया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा फसलों का विविधीकरण करके 12वीं पंचवर्षीय योजना मे चार फीसदी की कृषि विकास दर का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। इसके लिए अधिक उपज देने वाले रोग प्रतिरोधी बीजों का विकास, जल प्रबंधन व्यवस्था में सुधार, उर्वरकों व कीटनाशकों के संतुलित उपयोग को प्रोत्साहन देना होगा।

राष्ट्रपति ने वर्ष 2011-12 में कृषि क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों की सराहना करते हुए उन्हें पुरस्कृत किया। एक करोड़ से अधिक अनाज उत्पादन के मध्य प्रदेश, पंजाब और राजस्थान को कृषि कर्मण पुरस्कार से नावाजा गया। इसी प्रकार दस लाख टन से एक करोड़ टन तक उत्पादन करने के लिए तमिलनाडु, गुजरात और उत्तराखंड को पुरस्कृत किया गया। वहीं उत्तर प्रदेश को मोटे अनाज, हरियाणा व हिमाचल को गेहूं और बिहार को चावल और झारखंड, असम व पश्चिम बंगाल को दालों के उत्पादन के लिए पुरस्कार दिया गया।
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