भारत को तेल एवं गैस उत्खनन और उत्पादन क्षेत्र में आत्म निर्भर बनने के साथ ही ऊर्जा सुरक्षा के लक्ष्य को हासिल करने के प्रयास करने चाहिए। यह देश की जीडीपी को रफ्तार देने में काफी सहायक साबित होगा।
प्राइसवॉटरहाउसकूपर्स की ओर से भारत में तेल एवं गैस उत्खनन व उत्पादन उद्योग पर जारी एक समीक्षा रिपोर्ट में कहा गया है कि ऊर्जा के क्षेत्र में भारत के आयात मुक्त हो जाने पर हासिल होने वाले आर्थिक लाभ की बदौलत देश के मौजूदा जीडीपी में 6.5 फीसदी की वृद्धि होगी। यदि 50 फीसदी घरेलू जरूरत भी घरेलू उत्पादन से पूरी की जा सके, तो इससे 47.2 अरब डॉलर का अतिरिक्त मूल्य हासिल होगा। इससे अगले 20 वर्षों में 37 लाख व्यक्तियों के लिए रोजगार के मौके पैदा हो सकते हैं।
रिपोर्ट में केंद्र सरकार, सरकारी तेल कंपनियों, निजी व देश में निवेश करने वाली कंपनियों, सेवा क्षेत्र और राज्य सरकारों के साथ भागीदारी करते हुए ऊर्जा सुरक्षा के लक्ष्य को हासिल करने की सलाह दी गई है।
रिपोर्ट के बारे में पीडब्लूसी इंडिया के प्रमुख (ऑयल एंड गैस) दीपक महुरकर ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा के चलते हासिल होने वाले आर्थिक फायदे जबर्दस्त होते हैं। हमें भारत के परिदृश्य में आज बेहद महत्वपूर्ण बन चुके ऊर्जा क्षेत्र के बारे में चर्चा करने की जरूरत है। जिससे इस बात पर सहमति बनाई जा सके कि खनन और उत्पादन क्षेत्र को किस प्रकार विकसित किया जाना चाहिए।
2011-12 में भारत का तेल आयात देश के कुल निर्यात का लगभग 50 फीसदी था। रिपोर्ट के मुताबिक, देश का 54 फीसदी व्यापार घाटा तेल कारोबार में घाटे के चलते रहा। इसकी वजह से ही रुपये की कीमत कमजोर होती गई और विदेशी मुद्रा विनिमय पर 12.8 अरब डॉलर का दबाव बना। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि भारत अपने मौजूदा घरेलू उत्पादन से 1.7 करोड़ टन अधिक उत्पादन कर लेता तो इस स्थिति को रोका जा सकता था।
रिपोर्ट में ऊर्जा सुरक्षा के लक्ष्य को हासिल करने और भारत में सर्विस क्षेत्र को विकसित करने पर जोर दिया गया है। आर्थिक लाभ के अलावा, आत्म-निर्भरता से सरकार को पेट्रोलियम क्षेत्र से मिलने वाले मौजूदा राजस्व से 25 फीसदी अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हो सकता है।