विशेष आर्थिक क्षेत्रों (सेज) में निवेशकों के भरोसे को जगाने के लिए सरकार इसके नियमों को अधिक लचीला बनाने पर विचार कर रही है।
उद्योग जगत को उम्मीद है कि सरकार सेज के आकार में रियायत के अलावा स्थित इकाइयों को मूल कारोबार में असफल रहने के बाद अन्य कारोबार शुरू करने की छूट भी दे सकती है। इस बारे में औद्योगिक संगठनों और वाणिज्य मंत्रालय के बीच कई बार बातचीत हो चुकी है लेकिन फिलहाल मामला वित्त मंत्रालय में अटका है।
सेज मामलों के विशेषज्ञ और एसोचैम की सेज टॉस्क फोर्स से जुड़े हितेंद्र मेहता का कहना है कि विशेष आर्थिक क्षेत्रों को आकर्षक बनाने के लिए सरकार को कई नीतिगत बदलाव करने की जरूरत है। अभी सेज के भीतर स्थित इकाइयों को मूल कारोबार में नाकाम होने की स्थिति में कोई दूसरा कारोबार शुरू करने की छूट नहीं है।
उम्मीद की जा रही है कि सेज के नए दिशानिर्देशों में सरकार इस मामले में कुछ छूट दे सकती है। मेहता का कहना है कि सेज से जुड़े प्रावधानों को अधिक लचीला बनाने की आवश्यकता है।
हाल ही में वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा ने एक महीने के अंदर सेज के नए दिशानिर्देश जारी होने की उम्मीद जताई थी। मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि इस बारे में वित्त मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा जा चुका है।