ई-कॉमर्स से खुदरा कारोबारियों (रिटेलर्स) के कारोबार को कोई खतरा नहीं है। उल्टे, ई-कॉमर्स के बढ़ने से खुदरा कारोबारियों का भी कारोबार बढ़ेगा, ऐसा मानना है ई-कॉमर्स कारोबार से जुड़ी कंपनियों का।
गूगल इंडिया के निदेशक (ई-कॉमर्स एवं ऑनलाइन क्लासीफाइड) नितिन बवनकुले के मुताबिक ई-कॉमर्स के आने से खुदरा कारोबारियों को कोई खतरा नहीं है। अभी भारत में लगभग 0.5 फीसदी कारोबार ही ऑनलाइन हो रहा है। बाकी के 99.5 फीसदी बाजार पर खुदरा कारोबारियों का ही आधिपत्य है।
स्नैपडील के सह-संस्थापक रोहित बंसल के मुताबिक चीन व कोरिया में कई सालों से ई-कॉमर्स का कारोबार हो रहा है, फिर भी वहां क्रमश: 9 व 14 फीसदी लोग की ऑनलाइन खरीदारी करते हैं। वह कहते हैं कि खुदरा कारोबारियों का कारोबार हमेशा चलता रहेगा।
बंसल के मुताबिक ई-रिटेलिंग के आने से कई छोटे कारोबारी अब अपना सामान ई-रिटेल के प्लेटफार्म से बेच रहे हैं।
गौरतलब है कि इस साल अक्तूबर में दीपावली के दौरान उपभोक्ता वस्तुओं के विक्रेताओं ने इस मामले को जोरशोर से उठाया था कि ऑनलाइन कारोबार की वजह से उनके कारोबार में कमी आ रही है, क्योंकि ऑनलाइन कारोबार खुदरा कारोबारियों के मुकाबले कम कीमत पर सामान बेंच रहे हैं।
खुदरा कारोबारियों ने सरकार से ऑनलाइन कारोबार को नियंत्रित करने के लिए कानून बनाने की भी मांग की है।
गूगल की रिपोर्ट के मुताबिक अगले तीन साल में ऑनलाइन खरीदारों की संख्या में तीन गुना इजाफा होने की संभावना है।
अभी ऑनलाइन खरीदारों की संख्या 3.5 करोड़ है, जो वर्ष 2016 में बढ़कर 10 करोड़ से अधिक हो जाएगी। वर्ष 2012 में ऑनलाइन खरीदारों की संख्या सिर्फ 80 लाख थी। वर्ष 2016 तक भारत का ऑनलाइन कारोबार 15 अरब डॉलर का हो जाएगा।