प्राकृतिक गैस की नई कीमतें तय करने के लिए सरकार की तरफ से जारी ताजा अधिसूचना एनईएलपी से पहले के आवंटित ब्लॉकों के लाइसेंसियों के लिए सिरदर्दी का सबब बन गया है। दरअसल, एनईएलपी से पहले आवंटित ब्लॉकों से निकली गैस की कीमत तय करने में एकरूपता का अभाव है। इसलिए इनके साथ अलग-अलग प्रोडक्शन शेयरिंग कांट्रेक्ट (पीएससी) किया गया है। एकरूपता नहीं होने के कारण उन्हें अलग-अलग कीमत मिल रही है।
केंद्र में सरकार बनाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्राकृतिक गैस की कीमतों पर ध्यान देने की बात कहते हुए पुराने फैसलों पर अमल करने से इंकार कर दिया था। इसी दिशा में काम हुआ और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने गैस की कीमत के बारे में अधिसूचना जारी कर दी, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि नेशनल एक्सप्लोरेशन लाइसेंसिंग पॉलिसी (एनईएलपी) से पहले आवंटित ब्लॉकों पर यह अधिसूचना लागू नहीं होती है। ऐसे ब्लॉकों के मामले तो अलग-अलग हुए पीएससी के आधार पर ही कीमतें तय होती हैं, इसलिए इनकी मुश्किल है।
उदाहरण के लिए पन्ना, मुक्ता, ताप्ती (पीएमटी) और रेवा ब्लॉकों को देखें, तो इसके लिए वर्ष 1994 में ही पीएससी पर हस्ताक्षर हो गया था, जबकि एनईएलपी का खाका वर्ष 1997-98 में खींचा गया। इन ब्लॉकों की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों के आधार पर तय होती हैं।
इनके लिए तय किए गए फार्मूले के मुताबिक इन ब्लॉकों से निकली गैस की कीमत का निचला स्तर 2.11 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू है, जबकि ऊपरी स्तर 3.11 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू है। ब्लॉक से गैस की आपूर्ति शुरू होने के 7 साल के बाद गैस की ऊपरी कीमतों में बदलाव का प्रावधान है। यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में पिछले 18 महीनों की कीमतों के औसत से 150 से 90 फीसदी तक हो सकता है।
इसी फार्मूले के आधार पर पन्ना और मुक्ता क्षेत्र से निकले गैस की कीमत 5.73 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू, जबकि ताप्ती के गैस की कमीत 5.57 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू तय हुई है। सरकार की तरफ से गैस खरीदनेे वाली कंपनी गेल इंडिया लिमिटेड इसी कीमतों के आधार पर गैस खरीदती है।
रेवा क्षेत्र की भी अपनी समस्या है। रेवा और रेवा सेटेलाइट क्षेत्र में व्यवस्था है कि आपूर्ति शुरू होने के पांच साल के बाद सरकार और लाइसेंसी मिल कर गुड फेथ नेगोशिएशन करेंगे। इस बातचीत में सभी पहलुओं पर ध्यान दिया जाएगा और तभी गैस की कीमतें तय होंगी।
रेवा से निकले गैस की अभी कीमत 3.5 डॉलर एमएमबीटीयू है, जबकि रेवा सेटेलाइट का 4.3 डॉलर एमएमबीटीयू। इसके संशोधित कीमत के लिए अभी बातचीत पूरी नहीं हुई है। इसलिए पुरानी कीमतों के आधार पर ही खरीद हो रही है। यहां सवाल उठता है कि नई अधिसूचना एनईएलपी से पहले आवंटित 28 ब्लॉकों पर लागू होगी या नहीं। इस बारे में सरकार की तरफ से भी स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है।