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टेलीकॉम कंपनियों के लिए स्पेक्ट्रम खरीदना हुआ सस्ता

Tue, 10 Sep 2013 12:03 AM IST
अमर उजाला, दिल्ली
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पहले दो दौर में स्पेक्ट्रम की नीलामी नाकाम होने के बाद अब टेलीकॉम नियामक (ट्राई) ने जीएसएम सेवाओं की कीमतों में भारी कमी करने की सिफारिश कर दी है।
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ट्राई ने इसके तहत 1800 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम की पूरे देश में नीलामी कीमतों में 60 फीसदी से ज्यादा की कटौती की है।

साथ ही 900 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम के लिए दिल्ली, मुंबई, कोलकाता में कीमतें 79 फीसदी तक कम कर दी है। ट्राई के इस कदम से टेलीकॉम कंपनियों को अब जीएसएम सेवाएं के लिए स्पेक्ट्रम खरीदना सस्ता हो जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2जी स्पेक्ट्रम में घोटाला सामने आने के बाद फरवरी 2012 में 122 लाइसेंस रद्द कर दिए गए थे। इसके बाद सरकार सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सरकार नई कीमतों के आधार पर दो बार नीलामी करा चुकी है।
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नवंबर 2012 और मार्च 2013 में हुई नीलामी में टेलीकॉम कंपनियों ने सरकार द्वारा स्पेक्ट्रमों की ऊंची कीमत तय करने की वजह से बोली लगाने में दिलचस्पी नहीं दिखाई थी।

कंपनियां सरकार पर कीमतें करने का दबाव भी डाल रही थी। ऐसे में सोमवार को ट्राई ने 1800 मेगहार्ट्ज के लिए पूरे देश में नीलामी के लिए रिजर्व प्राइस 1,496 करोड़ करने की सिफारिश की है।

इसी तरह 900 मेगाहर्ट्ज के लिए ट्राई ने दिल्ली के लिए कीमत 288 करोड़ रुपए, मुंबई के लिए 262 करोड़ रुपए और कोलकाता के लिए 100 करोड़ रुपए करने की सिफारिश की है।

ट्राई द्वारा कीमतों में कमी करने की सिफारिश पर संवाददाता सम्मेलन में ट्राई चेयरमैन राहुल खुल्लर ने कहा कि ट्राई ने केवल रिजर्व प्राइस तय करने की सिफारिश की है। यह कोई अंतिम मूल्य नहीं है। स्पेक्ट्रम की वास्तविक कीमत क्या होगी यह तो नीलामी के जरिए बाजार तय करेगा।

ट्राई ने इसके अलावा मौजूदा सेवाएं देने वाली कंपनियों को अतिरिक्त लाभ मिलने के प्रावधान को खत्म कर दिया है। यानी कंपनियों का लाइसेंस खत्म होने के बाद उन्हें नए सिरे से नीलामी के जरिए ही लाइसेंस प्राप्त करना होगा।

इसके अलावा ट्राई ने टेलीकॉम कंपनियों के लिए स्पेक्ट्रम की ट्रेडिंग करने की छूट दी है। यानी कंपनियां अपने स्पेक्ट्रम को दूसरी कंपनियों को बेच सकेंगी। हालांकि बिक्री की यह प्रक्रिया लीज आधारित नहीं होगी।
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सुप्रीम कोर्ट द्वारा लाइसेंस रद्द करने के बाद नवंबर 2012 में हुई नीलामी के लिए सरकार ने 1800 मेगाहर्ट्ज के लिए 14000 करोड़ रुपए का बेस प्राइस रखा था।

इसके जरिए वह 40 हजार करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य लेकर चल रही थी, पर ऊंची कीमत होने की वजह से सरकार केवल 9,410 करोड़ रुपए जुटा पाई थी।

उसके बाद मार्च 2013 में हुई नीलामी में बेस प्राइस 3,622 करोड़ रुपए तय किया था। इसमें भी कंपनियों ने बेरुखी दिखाई थी।

स्पेक्ट्रम नीलामी अब तकः-
--ऊंचे रिजर्व प्राइस चलते पिछले साल नवंबर और इस साल मार्च में स्पेक्ट्रम के नीलामी असफल रही।
--नवंबर की नीलामी में 1,800 मेगाहर्ट्ज के जीएसएम बैंड के पैन इंडिया ब्लॉक स्पेक्ट्रम के लिए 14,000 करोड़ रुपए का रिजर्व प्राइस रखा गया था।
--सरकार इस नीलामी से टारगेट की तुलना में एक चौथाई फंड ही हासिल कर सकी। इसमें 60 फीसदी स्पेक्ट्रम बिना बिके रह गया था।
--मार्च में रिजर्व प्राइस कम किया गया, लेकिन अधिकतर ऑपरेटर एक बार फिर से नीलामी से दूर रहे
--दूसरे दौर की इस नीलामी में सीडीएमए स्पेक्ट्रम का 40 फीसदी ब्लॉक ही बिक सका।

टेलीकॉम कंपनियों का कर्ज बढ़ा
टेलीकॉम इंडस्ट्री के संगठन के आकलन के अनुसार, 2012-13 में इंडस्ट्री का कुल कर्ज 2.5 लाख करोड़ रुपए हो गया है। यह 2011-12 में 1.85 लाख करोड़ रुपए ही था। टेलीकॉम कंपनियों ने इस कर्ज का बहुत बड़ा हिस्सा 2010 में हुई नीलामी में 3जी स्पेक्ट्रम हासिल करने के लिए लिया था।
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