भारतीय दूरसंचार कंपनियां स्पेक्ट्रम हासिल पर आई लागत को वसूलने के लिए कॉल की दरों में धीरे धीरे इजाफा कर सकती हैं।
दूरसंचार कंपनियों ने स्पेक्ट्रम के लिए बोली लगाने में 1.1 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं। रेटिंग एजेंसी मूडीज ने यह बात कही है।
मूडीज ने कहा है कि स्पेक्ट्रम की ऊंची लागत दूरसंचार कंपनियों के लिए क्रेडिट नेगटिव है क्योंकि इससे उनके कर्ज और लागत में इजाफा होगा और भविष्य की विस्तार योजनाओं में निवेश की उनकी क्षमता घटेगी।
हालांकि दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने हाल में कहा था कि एक विशेषज्ञ द्वारा उनके साथ साझा किए गए विश्लेषण के मुताबिक दूरसंचार कंपनियों पर सालाना बोझ लगभग 5,300 करोड़ रुपये और 1.3 पैसे प्रति मिनट कॉल का पड़ेगा।
मूडीज ने यह भी कहा है कि 3 जी डेटा सेवाओं के लिए बढ़ती मांग से कंपनियों के लिए स्पेक्ट्रम की लागत वसूलने में मदद करेगी और उसे उम्मीद है कि कंपनियां तार्किक कीमत रखेंगी।