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सेट टॉप बॉक्स उत्पादन में टेक्नोलॉजी का रोड़ा

Fri, 30 Nov 2012 03:10 PM IST
नई दिल्ली/प्रशांत श्रीवास्तव
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डिजिटलाइजेशन के लिए देश में सेट टॉप बॉक्स के कारोबार को भुनाने की कोशिश में सरकार की योजना अमल में आने से पहले ही असफल होती नजर आ रही है। तकनीक में पीछे होने की वजह से देश के छोटे कारोबारियों को करीब 6,500 करोड़ रुपये के कारोबार से हाथ धोना पड़ेगा।
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सूचना और प्रसारण मंत्रालय देश भर में पूरी होने वाली डिजिटाइजेशन प्रक्रिया के लिए छोटे और मझोले कारोबारियों के जरिए सेट टॉप बॉक्स का उत्पादन कराना चाहता है, जिसके लिए मंत्रालय ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय को पत्र भी लिखा है।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि सूचना और प्रसारण मंत्रालय के इस प्रस्ताव की प्रासंगिकता का अध्ययन करने के बाद इसे लागू करना मुश्किल है। अधिकारी के अनुसार सेट टॉप बॉक्स में इस्तेमाल होने वाली इनकोडर और डी-कोडर तकनीक फिलहाल देश में उपलब्ध नहीं है।
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अभी जो भी सेट टॉप बॉक्स भारत में आ रहा है, वह चीन से आयातित है। अधिकारी ने बताया कि सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने डिजीटलाइजेशन के अगले चरण में सेट टॉप बॉक्स का उत्पादन छोटे और मझोले कारोबारियों के जरिए कराने का प्रस्ताव भेजा था।

डी-कोडर, इन-कोडर तकनीक न होने से यह चीन से आयात करना महंगा पड़ रहा है। चीन के कारोबारी सेट टॉप बॉक्स में लगने वाले डी-कोडर व इन-कोडर इसके लिए 1200-1400 रुपये मांग रहे हैं, जबकि  वहां से पूरा सेट टॉप बॉक्स ही 1000 रुपये में आ जाता है। ऐसे में इसे भारतीय कारोबारियों का सेट टॉप बॉक्स बनाना प्रासंगिक नहीं रह जाएगा।

देश के चार मेट्रो शहरों में डिजिटलाइजेशन के तहत 6.5 करोड़ सेट टॉप बॉक्सों की मांग आई है। सरकार दूसरे चरण के तहत 38 शहरों में लागू करने जा रही है। ऐसे में बिना तैयारी के प्रस्ताव की वजह से एक बड़ा कारोबार देश के कारोबारियों के हाथ से निकल सकता है।
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