आमतौर पर हमारे देश में महिलाएं इक्विटी आधारित निवेश विकल्पों को अपनाने से कतराती हैं, पर इसे अपना कर वह अपना बेहतर पोर्टफोलियो तैयार कर सकती हैं। हम जब निवेश की बात करते हैं, तो हमें महज रिटर्न पर ध्यान देने के बजाय इसपर होने वाली कर कटौती के बाद मिलने वाले लाभ पर गौर करना चाहिए।
इस तरह देखने पर हम पाते हैं कि सामान्य निवेश पर 8 फीसदी का रिटर्न कर मुक्त निवेश पर मिलने वाले 8 फीसदी के रिटर्न से काफी कम बैठता है। मोटे तौर पर करयोग्य निवेश पर 8 फीसदी के रिटर्न से करीब 6.6 फीसदी का लाभ ही मिल पाता है। इस नजरिये से म्यूचुअल फंड की ईएलएसएस योजनाएं निवेश के अन्य विकल्पों से अधिक बेहतर हैं। बढ़ती महंगाई के मौजूदा दौर में कोई भी महिला सिर्फ सावधि जमा, डेट विकल्प में बचत कर पर्याप्त प्रतिलाभ प्राप्त नहीं कर सकती है, क्योंकि ये परिसंपत्तियां बढ़ती महंगाई पर रहन-सहन की लागत को कवर नहीं कर पाएंगी।
इसलिये अपनी बचत का कुछ हिस्सा इक्विटी आधारित विकल्पों में निवेश करना लाभकर हो सकता है। इस नजरिये से ईएलएसएस स्कीम सर्वश्रेष्ठ विकल्प की पेशकश करती हैं। इसका प्रमुख कारण यह है कि ईएलएसएस स्कीम्स द्वारा आयकर अधिनियम की धारा 80 सी के अंतर्गत प्रति निवेशक अधिकतम एक लाख रुपये के कर लाभ की पेशकश की जाती है।
दूसरा कारण यह है कि इक्विटी में लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न मिलता है और क्योंकि ईएलएसएस स्कीम में 3 वर्ष का लॉक होता है, इसलिये सर्वोत्कृष्ट जोखिम व्यवस्थित प्रतिलाभ प्राप्त होने की संभावना अधिक होती है। भारत जैसी तेजी से विकसित हो रही अर्थव्यवस्था में महिला निवेशकों को इक्विटी निवेश से अलग नहीं रहना चाहिए, बल्कि इन विकल्पों को अपनाते हुए इस प्रकार योजना बनानी चाहिए जिससे कि निवेश पर अधिक रिटर्न के साथ न्यूनतम करदेयता का लाभ लिया जा सके।