कॉरपोरेट जगत को टैक्स आतंकवाद और रेटोस्पेक्टिव टैकस से निजात दिलाने का दावा करने वाली मोदी सरकार ने म्यूचुअल फंड में अपनी जमा-पूंजी लगाने वाले आम निवेशकों पर टैक्स का बोझ बढ़ा दिया है। म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री और छोटे निवेशकों की मांग को दरकिनार करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने डेट म्यूचुअल फंड की बिक्री पर 10 के बजाय 20 फीसदी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स जारी रखा है। एक अप्रैल से 10 जुलाई के बीच डेट म्युचूअल फंड बेचने वालों को टैक्स के नए बोझ से राहत दी गई है लेकिन इस दौरान फंड खरीदने वालों पर पिछली तारीख (रेट्रोस्पेक्टिव) से इस टैक्स का बोझ बढ़ जाएगा।
लोकसभा में वित्त विधेयक पर बहस का जबाव देते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि नॉन-इक्विटी म्यूचुअल फंड पर 20 फीसदी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स एक अप्रैल के बजाय 10 जुलाई के बाद लागू होगा। इसे म्युचूअल फंड उद्योग ने मामूली राहत करार देते हुए कहा है कि इससे छोटे निवेशकों के हितों को नुकसान पहुंचेगा। वैल्यू रिसर्च के सीईओ धीरेंद्र कुमार का कहना है कि सरकार ने इस मामले में निवेशकों से बहुत कम राहत दी थी, जबकि टैक्स का बोझ बहुत ज्यादा बढ़ा है। जिन लोगों ने कम टैक्स दरों को देखकर म्युचूअल फंड में निवेश किया, ११ जुलाई के बाद उन पर दोगुने टैक्स की मार पड़ेगी। इसके अलावा यह कदम छोटे निवेशकों के हितों केखिलाफ है।
बजट में डेट फंड पर टैक्स बढऩे की आंशका को देखते हुए बहुत-से लोगों ने 10 जुलाई से पहले फंड की जमकर खरीदारी की थी। लेकिन ऐसे निवेशकों को कोई राहत नहीं मिली है। अभी तक बैंक और म्युचूअल फंड से होने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर टैक्स की दरों में अंतर था, लेकिन नए प्रावधानों के बाद यह अंतर समाप्त हो जाएगा। डेट एमएफ पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के लिए न्यूनतम अवधि 12 महीने से बढ़ाकर 36 महीने कर दी गई है। इससे भी म्यूचुअल फंड का आकर्षण कम होगा। जेटली का कहना है कि बैंक और म्यूचुअल फंड केबीच अंतर रहने का छोटे निवेशकों को विशेष लाभ नहीं हुआ है। ऐसे निवेशकों की संख्या भी कम है।
बुधवार को लोकसभा में ध्वनिमत से वित्त विधेयक पारित हो गया है। इस पर हुई बहस के दौरान वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भविष्य में कोई रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स नहीं लगाने का भरोसा दिलाया है।