हथियारों के बाजार में हाथ आजमाते हुए टाटा ग्रुप ने 155 एमएम की 52 कैलीबर वाली देसी तोप तैयार की है। इस तोप की क्षमता बोफोर्स तोप से भी ज्यादा है और इसके जरिए निजी क्षेत्र की ओर से रक्षा बाजार में टाटा ग्रुप ने मजबूत दावेदारी पेश की है।
हालांकि इसके लिए सरकार ने कोई प्रस्ताव नहीं दिया था। भारतीय सेना ने 1986 में अंतिम बार 30 किमी रेंज वाली बोफोर्स तोप के रूप में तोपें खरीदी थी। जबकि टाटा पावर द्वारा तैयार तोप की रेंज 52 किमी तक है।
बोफोर्स तोप से जुड़े विवाद के चलते सेना के बेड़े में पिछले ढाई दशक से कोई नई तोप नहीं आई है। सार्वजनिक उपक्रम में भी आयुध फैक्ट्री बोर्ड देसी बोफोर्स बना चुका है और अब सरकार के सामने सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच चुनने के अवसर मिल जाएंगे।
तोपखाने को दुरुस्त करने के लिए भारतीय सेना को आने वाले समय में करीब आठ अरब डॉलर की विभिन्न प्रकार की तोपें खरीदनी हैं। टाटा के सूत्रों के अनुसार उनकी तोप करीब 55 प्रतिशत स्वदेशी उपकरणों से बनी है जबकि उसकी नली और प्रमुख धातु का आयात किया गया है।
टाटा ने बेहद अचानक ढंग से यह तोप पेश कर हथियार बाजार को चौंका दिया है। टाटा ने इस तोप के विकास के लिए कुछ तकनीक अफ्रीका और पूर्वी यूरोप से खरीदी हैं।
टाटा की कोशिश अब अपनी तोप को स्वदेशी फायरिंग रेंज में आजमाने की है और कंपनी की ओर से रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के साथ गठबंधन कायम करने का भी प्रयास किया जा रहा है।