स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नई तकनीक विकसित करने और नवाचार को प्राथमिकता देने वाली निजी क्षेत्र की बिजली उत्पादक कंपनी टाटा पावर ने अपनी नई कोल ड्राइंग प्रोसेस पर आधारित कोल ड्राइंग डेमोंस्ट्रेशन प्लांट लगाने की दिशा में पहल की है।
इस प्लांट के जरिए कंपनी कोयला क्षेत्र की कंपनियों को कोल ड्राइंग की इस नई तकनीक से परिचित कराएगी। कंपनी ने इस तकनीक के ग्लोबल पेटेंट के लिए भी आवेदन किया है। कंपनी की वित्त वर्ष 2013-14 की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक कोल ड्राइंग प्रक्रिया के संबंध में भारतीय और अंतरराष्ट्रीय पेटेंट के लिए एक आवेदन फाइल किया गया है।
साथ ही एक प्रारंभिक डिजाइन रिपोर्ट भी तैयार की गई है। कंपनी का कहना है कि नई ड्राइंग प्रक्रिया का परीक्षण किया जा चुका है और यह प्रयोगशाला में 50-50 किलो कोयले के बैच पर सफल साबित हुई है। इस प्रक्रिया के तहत कोल ड्राइंग की लागत 0.10 रुपये प्रति किलोवाट आती है, जो कि फिलहाल इस्तेमाल में लाई जा रहीं कोल ड्राइंग की प्रणालियों की लागत की तुलना में काफी कम है।
टाटा पावर कंपनी लिमिटेड (टीपीसी) ने कार्बन डाई आक्साइड उत्सर्जन पर लगाए जाने वाले टैक्स की वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की है। इसके जरिए कंपनी भारत और अन्य वैसे देशों की तरफ से आवाज उठाना चाहती है, जिन्होंने कोयले के जरिए बिजली बनाने की शुरुआत अपेक्षाकृत देरी से की है।
कंपनी का कहना है कि कार्बन टैक्स के मसले पर कुछ विकसित देशों की ओर से नई पहल शुरू की गई। हालांकि, विकसित और विकासशील देशों के हितों में संतुलन बनाने की दिशा में अन्य दूसरे विकल्प विकसित करने की जरूरत है।
कंपनी ने अपनी रिपोर्ट में पावर ट्रेडिंग कारोबार में कड़ी प्रतिस्पर्धा के मुद्दे को भी उठाया है।
कंपनी का कहना है कि कड़ी प्रतिस्पर्धा के चलते बिजली कंपनियों की ट्रेडिंग मार्जिन पर भारी दबाव पड़ रहा है। टाटा पावर की सहायक इकाई टाटा पावर ट्रेडिंग कंपनी लिमिटेड (टीपीटीसीएल) देश की दूसरी सबसे बड़ी पावर ट्रेडिंग कंपनी है। 2013-14 में इसकी बाजार हिस्सेदारी 14.03 फीसदी रही। अवसर बढ़ने के साथ पावर ट्रेडिंग सेक्टर में चुनौतियां भी बढ़ी हैं।