रेलवे के इतिहास में सिविल कंस्ट्रक्शन का अब तक का सबसे बड़ा ठेका टाटा प्रोजेक्ट्स इंडिया तथा स्पेनिश कंपनी एलडेसा को दिया गया है। ईस्टर्न फ्रेट कारीडोर के कानपुर से खुर्जा के बीच 343 किमी के टुकड़े का ठेका इन कंपनियों को कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद डीएफसीसी ने दिया है। इस हिस्से के निर्माण पर 3300 करोड़ रुपए खर्च होंगे। वर्ष 2016 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
डीएफसीसी देश में पहली बार दो डेडीकेटेड रेल फ्रेट कारीडोर का निर्माण कर रहा है। यूपीए सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना को पूरा करने के लिए जापान तथा विश्व बैंक से वित्तीय सहायता ली गई है। पश्चिमी फ्रेट कारीडोर को जहां पूरी तरह जापानी संस्था जीका वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रही है वहीं ईस्टर्न फ्रेट कारीडोर के एक हिस्से को रेलवे अपने संसाधनों से बना रहा है जबकि अस्सी फीसदी हिस्से के लिए विश्व बैंक से वित्तीय मदद हासिल की जा रही है।
ईस्टर्न कारीडोर लुधियाना से पश्चिमी बंगाल के दानकुनी तक (1839 किमी) बनाया जा रहा है। इसमें मुगल सराय से लुधियाना के बीच कारीडोर के निर्माण को विश्व बैंक वित्तीय मदद दे रहा है।