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देश और रेल हित में होगा बजट: सुरेश प्रभु

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यह ठीक वैसी स्थिति है कि एक तरफ कुंआ तो दूसरी ओर खाई यानि रेलवे को पटरी पर लाने की चुनौती और मुसाफिर हितों का भी ध्यान रखना। रेल मंत्री सुरेश प्रभु कुछ ऐसी ही परिस्थतियों में बृहस्पतिवार को संसद में अपना दूसरा रेल बजट पेश करने जा रहे हैं। उम्मीद यही है कि इस बजट में रेल और यात्री दोनों पर प्रभु कृपा होने जा रही है।
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यात्रियों को सुहाने सफर के लिए सुविधाओं का हर विकल्प प्रभु की रेल देने जा रही है, लेकिन इसके उन्हें दाम भी चुकाने होंगे। रेल बजट की पूर्व संध्या पर रेल मंत्री ने किराए बढ़ोतरी को लेकर संस्पेंस बरकरार रखते हुए यही कहा कि देश और रेल हित में होगा यह बजट।

सफर के दौरान यात्रियों को सुविधाओं के अनेकों विकल्प मिलने की उम्मीद है। ठीक हवाई यात्रा के दौरान मिलने वाली सुविधाएं यानि कि पैसा फेंककर मनपसंद सीट लेने का विकल्प भी मिल सकता है। ई कैटरिंग के जरिए और स्टेशन पर हर ब्रांड के खाने का विकल्प भी होगा।
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यही नहीं ट्रेन पर रेलवे का खाना खाने का विकल्प भी यात्री को मिल सकता है। स्टेशनों का नवीनीकरण भी एजेंडे में है। एस्कलेटर्स से लेकर फूड प्लाजा और मॉल जैसी योजनाएं हैं। कुछ माह पूर्व रेलवे ने एडवांस रिजर्वेशन की अवधि चार माह कर दी थी अब इसे वापस दो माह पर लाया जा सकता है।

गतिमान ट्रेनों पर रहेगा जोर

पिछले बजट की तरह इस बार भी बुलेट ट्रेन और गतिमान ट्रेनों पर जोर रहेगा। बजट का बड़ा हिस्सा इनके संचालन के लिए घोषित किया जा सकता है। गतिमान ट्रेनों के लिए दो से तीन रूटों की घोषणा हो सकती है, जबकि बुलेट ट्रेन के लिए भी एक अन्य रूट पर सर्वे की घोषणा की जा सकती है।

इसी तरह सुरक्षा को लेकर खासतौर पर मानवरहित फाटकों को खत्म करने या फिर उनमें ट्रेन गुजरने के दौरान ऑटोमैटिक अलार्म की सुविधा के लिए भी बजट घोषित हो सकता है। ऑन बोर्ड हाउस कीपिंग का दायरा चार सौ ट्रेनों में बढ़ाया जा सकता है।

स्मार्ट कोचेज की घोषणा हो सकती है, जिसके जरिए मेक इन इंडिया को रेलवे साधेगा। इन कोचेज में एलईडी जैसी सुविधाएं होंगी साथ ही सब कुछ एक रिमोट कंट्रोल के सहारे केंद्रित होगा।

प्रोजेक्टों के नाम पर रेल ट्रैफिक को सुचारु करने के लिए लाइनों के दोहरी, तिहरी और चौहरीकरण की घोषणाएं हो सकती हैं। नई ट्रेनों को चलाने की घोषणा तो नहीं होगी, लेकिन ट्रेनों में कोचेज की संख्या बढ़ाए जाने की घोषणा हो सकती है। अतिरिक्त किराए के साथ महामना जैसी ट्रेनों के संचालन की भी घोषणा हो सकती है।
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32 हजार करोड़ का बोझ पाटने की चुनौती

रेलवे के सामने सातवें पे कमीशन के लागू होने पर 32 हजार करोड़ रुपये के बोझ से निपटने की चुनौती है। दिक्कत यह भी है कि इस बार रेलवे के ट्रेन यात्रियों में तो कमी आई ही है साथ ही माल भाड़े का लक्ष्य भी हासिल नहीं किया जा सका है।

यही कारण है कि रेल मंत्री माल भाड़े को तर्क संगत किए जाने की भी घोषणा कर सकते हैं। मेट्रो की तर्ज पर ट्रेनों के अंदर विज्ञापन लगाए जाने की घोषणा हो सकती है, साथ ही खाली पड़ी जमीनों का भी व्यवसायिक उपयोग हो सकता है।


सीनियर सिटीजन को एसी-1 में नहीं मिलेगी छूट

सीनियर सिटीजन यात्रियों को रेलवे की ओर से 40 और 50 प्रतिशत की छूट दी जाती है, लेकिन रेलवे एसी-1 में यात्रा करने वाले इन यात्रियों की यह छूट समाप्त कर सकती है।

यही नहीं इस बजट में सोशल मीडिया को खास जगह मिलने की उम्मीद है। इसके लिए स्टार्ट अप इंडिया के तहत अलग से सेल की स्थापना के साथ यात्रियों की टिकटिंग को भी फेसबुक, ट्विटर पर जोड़ा सकता है।
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