सहारा समूह को अपनी दो कंपनियों में लगे निवेशकों के पैसे 15 फीसदी ब्याज के साथ फरवरी तक किस्तों में लौटाने होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने सैट के निर्णय के खिलाफ सहारा की याचिका पर सुनवाई करते हुए बुधवार को यह फैसला सुनाया। मुख्य न्यायाधीश अल्तमस कबीर की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सहारा को निर्देश दिया है कि वह तत्काल 5,120 करोड़ रुपये का ड्राफ्ट सेबी के पास जमा कराए और बकाया रकम दो अन्य किस्तों में चुकाए।
कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि सहारा को 10,000 करोड़ रुपये की पहली किस्त जनवरी 2013 के पहले सप्ताह में देनी होगी और बाकी बची रकम फरवरी के पहले सप्ताह में चुकानी होगी। बेंच ने अपने आदेश के साथ सहारा के प्रति कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि वह उसकी याचिका पर सुनवाई केवल निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए कर रहा है।
सहारा द्वारा रकम लौटाने के लिए और मोहलत मांगे जाने पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि इस मामले में सहारा के अब तक के रवैये को देखते हुए उसे और मोहलत नहीं दी जा सकती। सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह से 20 दिसंबर तक सारे दस्तावेज जमा करने को भी कहा है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अगर सहारा भुगतान में कोई डिफॉल्ट करता है, तो सेबी को उसके खिलाफ कार्रवाई करने पूरा अधिकार है।
चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच ने अपने निर्णय में 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट की एक अन्य बेंच द्वारा इस मामले में सहारा के लिए पैसे लौटाने के लिए निर्धारित नवंबर तक की अवधि में संशोधन करते हुए उसे फरवरी तक का समय दिया है, जिसका सेबी ने पुरजोर विरोध किया।
सेबी का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट की ही एक दूसरी बेंच द्वारा निर्धारित अवधि में बदलाव किया जाना ठीक नहीं होगा। साथ ही कोर्ट से उसने इस मामले की सुनवाई जस्टिस केएस राधाकृष्णन और जस्टिस जेएस खेहर द्वारा ही किए जाने की मांग भी की। निवेशकों के एक एसोसिएशन ने भी कहा कि फैसला उसका पक्ष सुने बिना सुनाया जा रहा है।
एसोसिएशन के वकील का कहना था कि कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि वह निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए मामले की सुनवाई कर रहा है, ऐसे में उसका पक्ष भी सुना जाना चाहिए। कोर्ट ने असहमति जताते हुए इससे इंकार कर दिया। सहारा समूह के वकील सतीश किशन किशनचंदानी ने एक विज्ञप्ति में कहा है कि सहारा ने पहले ही ओएफसीडी धारकों को रकम की अदायगी के लिए पे ऑर्डर तैयार रखा है।