रेल किराए के बाद मोदी सरकार के कड़े फैसलों की गाज चीनी की मिठास पर पड़ सकती है। किसानों के बकाया भुगतान के नाम सरकार चीनी उद्योग को बड़ा तोहफा देने जा रही है।
निर्यात बढ़ाने के सितंबर तक ३३०० रुपये प्रति टन सब्सिडी दी जाएगी, जबकि विदेशी चीनी की आपूर्ति रोकने के लिए आयात शुल्क १५ से बढ़ाकर ४० फीसदी करने का फैसला लिया गया है।
इस साल चीनी उत्पादन पहले ही कम है और कमजोर मानसून की मार गन्ना पर पड़ी तो चीनी के दाम भड़कने तय हैं।
सोमवार को प्रधानमंत्री के निर्देश पर हुई मंत्रियों की उच्च स्तरीय बैठक के बाद खाद्य मंत्री राम विलास पासवान ने बताया कि सरकार नकदी से जूझ रही चीनी मिलों को ४४०० करोड़ रुपये का ब्याज मुक्त कर्ज मुहैया कराएगी।
लेकिन यह कर्ज किसानों के बकाया भुगतान की शर्त पर मिलेग। उद्योग की दिक्कतें दूर करने के लिए आयात शुल्क १५ फीसदी से बढ़ाकर ४० फीसदी किया जाएगा।
साथ ही निर्यात मिलने वाली ३३०० रुपये प्रति टन की सब्सिडी सिंतबर तक जारी रहेगी। सरकार पेट्रोल में ५ के बजाय के १० फीसदी एथनॉल मिश्रण को भी अनिवार्य करने जा रही है।
इससे भी लंबी अवधि में चीनी उत्पादन पर असर पड़ सकता है। इस बैठक में नितिन गडकरी, निर्मला सीतारमण, कलराज मिश्र, मेनका गांधी और डॉ. संजीव बालियान के अलावा प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा और कैबिनेट सचिव अजित सेठ भी मौजूद थे।
१५-२० लाख टन चीनी निर्यात की तैयारी
पिछले पेराई सीजन के मुकाबले इस बार चीनी उत्पादन करीब ८ लाख टन कम है। अक्टूबर, २०१३ में पेराई सत्र ९३ लाख टन चीनी भंडार के साथ शुरू हुआ था। इस सीजन में १९-२० लाख चीनी का निर्यात होने की उम्मीद है।
इस तरह सितंबर, २०१४ में नया पेराई सीजन करीब १८-२० लाख टन कम स्टॉक के साथ शुरू होगा। इस दौरान अगर निर्यात बढ़ता है तो स्टॉक में और कमी आएगी।
पूरे सीजन में उत्पादन 242 लाख होने की संभावना है, जबकि पिछले साल 251 लाख टन हुआ था।
२-३ रुपये महंगी हो सकती है चीनी
चीनी पर आयात शुल्क एक झटके में २५ फीसदी बढऩे से चीनी के दाम २-३ रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ सकते हैं।
इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के डीजी अबिनाश वर्मा का कहना है कि मिलों को लागत निकालने के लिए चीनी के दाम बढऩे जरूरी हैं।
आयात शुल्क लगने से विदेशी चीनी आने का रास्ता बंद हो जाएगा। वर्मा का कहना है कि इस फैसले से घरेलू बाजार में चीनी के भाव मजबूत होंगे।
क्यों महंगी होगी चीनी
चीनी का उत्पादन इस साल कम होने की आशंका है। आयात शुल्क १५ से बढ़कर ४० फीसदी होने से आयात महंगा होगा। निर्यात सब्सिडी जारी रहने से चीनी का ज्यादा निर्यात होगा। पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण ५ से बढ़ाकर १० फीसदी करने से भी कीमतों में तेजी के आसार है।