अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम लुढ़क कर 88.23 डॉलर के निचले स्तर तक आने के साथ ही सरकार रियायती सिलेंडरों की संख्या फिर से प्रति परिवार सालाना 12 से घटाकर नौ करने की तैयारी में है। ऐसा माना जा रहा है कि वित्त मंत्रालय ने सब्सिडीयुक्त एलपीजी सिलेंडरों की संख्या दोबारा नौ करने का प्रस्ताव आगे किया है। इसके साथ ही मंत्रालय ने ब्रांडेड डीजल पर उत्पाद शुल्क घटाने का प्रस्ताव खारिज कर दिया है और इसके बजाय अनब्रांडेड डीजल पर उत्पाद शुल्क लगाने की सिफारिश की है।
सरकार के सूत्रों का कहना है कि वित्त मंत्रालय रियायती सिलेंडरों की संख्या प्रति परिवार सालाना 12 से घटाकर नौ करने का प्रस्ताव पहले ही रख चुका है। मंत्रालय का मानना है कि सरकार डायरेक्ट कैश ट्रांसफर पर फोकस कर रही और सब्सिडी के लिए वास्तविक लाभार्थियों को लक्ष्य कर रही है, ऐसे में यह अहम है कि रियायती सिलेंडरों की संख्या नौ के दायरे में लाई जाए। इस मामले पर वित्त मंत्री अरुण जेटली के साथ व्यय विभाग चर्चा कर चुका है और इस मुद्दे पर कुछ हलचल साल के अंत तक या अगले बजट के दौरान दिखाई दे सकती है। यूपीए-2 के कार्यकाल में रियायती एलपीजी सिलेंडरों की संख्या नौ से बढ़ाकर 12 की गई थी, जिससे सरकारी खजाने और तेल विपणन कंपनियों पर 5,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त सब्सिडी बोझ बढ़ गया।
सूत्रों का कहना है कि एनडीए सरकार एक पारदर्शी सब्सिडी प्रणाली और उचित ईंधन नीति लाना चाहती है, जिससे कि तेल कंपनियां पब्लिक से पैसे जुटाते समय अपने शेयरों के उचित दाम हासिल करने में सक्षम हो सके। सरकार विनिवेश के जरिए ओएनजीसी में अपनी हिस्सेदारी घटाना चाहती है। इसके लिए सरकार को कैग की हालिया रिपोर्ट में की गई सिफारिशों के मुताबिक एक पारदर्शी ईंधन मूल्य निर्धारण प्रणाली या व्यवस्था बनानी होगी। मूल्य निर्धारण प्रणाली का ओएनजीसी पर सीधा असर होता है। ओएनजीसी बाजार भाव से कम पर डीजल, केरोसिन और कूकिंग गैस की बिक्री लागत का एक हिस्सा साझा करती है।
अधिकारियों का कहना है कि सरकारी रिफाइनरियों को सब्सिडी के रूप में छूट का भुगतान करने के बाद ओएनजीसी पिछले वित्त वर्ष में केवल 40.97 डॉलर प्रति बैरल की कीमत चार्ज करने में सक्षम थी, जबकि बाजार भाव करीब 106 डॉलर प्रति बैरल था। सरकार कंपनियों के लिए प्रति बैरल भाव 60 डॉलर कर सकती है जो इंडस्ट्री की 65 डॉलर की मांग के आसपास है। एक अधिकारी ने बताया कि सब्सिडी साझा करने के लिए एक विस्तारित नीति लाने से ओएनजीसी के शेयरों को बेहतर मूल्य मिलने में मदद मिलेगी। इस साल ओएनजीसी में 5 फीसदी हिस्सेदारी बेचकर सरकार करीब 18,000 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में है।
दूसरी ओर, वित्त मंत्रालय ने ब्रांडेड हाई स्पीड डीजल (एचएसडी) पर उत्पाद शुल्क घटाने के पेट्रोलियम मंत्रालय के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है और इसके बजाय अनब्रांडेड डीजल पर उत्पाद शुल्क बढ़ाने की सिफारिश की है।