केंद्र में नई सरकार के आने के बाद शेयर बाजार तो नित नई ऊंचाई पर जा रहा है लेकिन छोटे (खुदरा) निवेशकों के बीच वैसा उत्साह नहीं लौटा है, जैसा वर्ष 2008 से पहले था। इस समय स्थिति तो ऐसी है कि जिन छोटे निवेशकों ने पहले डीमैट खाता खुलवा लिया था, उनका खाता इनएक्टिव पड़ा है और नए निवेशक तो शेयर बाजार में उतरने के बजाय बैंक की सावधि जमा खाता या डाकघर की जमाओं को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं। इन खुदरा निवेशकों के बीच फिर से कैसे भरोसा कायम हो, इन सब मुद्दों पर अमर उजाला के शिशिर चौरसिया ने बाम्बे स्टॉक एक्सचेंज के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीष कुमार चौहान से विस्तार से बातचीत की। पेश हैं इस खास बातचीत के अंश:-
शेयर बाजार में सूचकांक ऊंचाई के नए रिकॉर्ड बना रहे हैं, इसमें छोटे निवेशकों की कितनी भागीदारी है?
आपने छोटे निवेशकों का जिक्र किया, तो मैं इसे मान कर चल रहा हूं रिटेल इंवेस्टर। सही कहें, तो भारत में अभी रिटेल इंवेस्टर की बाजार से दूरी खत्म नहीं हुई है। यदि रिटेल इंवेस्टर एक बार फिर से शेयर बाजार की तरफ रुख कर लें, तो शेयर बाजार का कुछ अलग ही रूप सामने आएगा।
रिटेल इंवेस्टर शेयर बाजार की तरफ रुख क्यों नहीं कर रहे हैं ?
उत्तर- इसकी सबसे बड़ी वजह है विश्वास की कमी। आपने अभी वर्ष 2008 का जिक्र किया। उस समय दुनिया की सभी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सुस्ती का माहौल था। जाहिर है कि भारत पर भी उसका असर पड़ा। उस समय शेयर बाजार का संवेदी सूचकांक तेजी से नीचे आया और निवेशकों को काफी नुकसान हुआ। बड़े निवेशक या विदेशी निवेशक तो गुणा-भाग करके निवेश करते हैं, पर रिटेल इंवेस्टर विश्वास और इधर-उधर से कुछ जानकारी ले कर निवेश करते हैं। उस समय उन्हें जो नुकसान हुआ, उसके चलते वह अब बाजार में स्थिति ठीक होने के बाद भी डर रहे हैं। छोटे निवेशकों की हालत इस समय दूध का जला छाछ भी फूंक फूंक कर पीता है, की कहावत वाली है।
छोटे निवेशकों में फिर से भरोसा कैसे बहाल किया जा सकता है?
इसके लिए सरकार को कुछ गंभीर प्रयास करने होंगे। सरकार की इस समय नीतियां कुछ ऐसी हैं, जो कि डेरिवेटिव ट्रेडिंग को बढ़ावा दे रही हैं। इस समय फ्यूचर/आप्शन ट्रेडिंग पर सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (एसटीटी) नहीं है, जबकि शेयरों की ट्रेडिंग पर यह लग रहा है। अब कमोडिटी ट्रेडिंग तो आम लोगों को समझ में आती नहीं, और जो समझ में आता है उस पर टैक्स ज्यादा है।
इसके अलावा भी कुछ किया जा सकता है?
सरकार चाहे तो जरूर कुछ कर सकती है। सरकार का फोकस रोजगार सृजन पर होना चाहिए। यदि छोटे निवेशक शेयर बाजार में पैसा लगाएंगे तो उद्योग-धंधों को निवेश के लिए पैसा मिलेगा और उससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इस समय आईपीओ में खुदरा निवेशकों के लिए छूट की सीमा और उनके लिए शेयरों का आरक्षण कम है, उसे भी बढ़ाया जा सकता है। मैं तो कहता हूं कि इस समय जो सरकारी कंपनियों का विनिवेश कार्यक्रम चलेगा, उसमें छोटे निवेशकों के लिए ज्यादा आरक्षण मिले। लोगों का पीएसयू कंपनियों पर भरोसा भी है।
छोटे निवेशकों के बीच विश्वास बहाली में बीएसई की भूमिका नहीं बनती?
हमारी भी भूमिका बनती है। हम प्रयास भी कर रहे हैं। हम देश के विभिन्न शहरों में जाकर निवेशकों को जागरूक करने के लिए संगोष्ठियां कर रहे हैं। इस समय हम साल में करीब 2,500 संगोष्ठियों का आयोजन कर रहे हैं जिनमें करीब तीन लाख निवेशकों को भाग लेने का मौका मिलता है। ऐसा नहीं है कि ये संगोष्ठियां सिर्फ मेट्रो शहरों में ही हो रही हैं। हम मेट्रो के अलावा अन्य शहरों में भी इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन कर रहे हैं।