भारतीय इस्पात उद्योग को 2025-26 तक 20 करोड़ टन की क्षमता बढ़ाने के लिए 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश की आवश्यकता होगी। इंडस्ट्री के अनुमान के अनुसार, 10 लाख टन कच्चे इस्पात की क्षमता को बढ़ाने के लिए 4,000 करोड़ के निवेश की आवश्यकता होती है।
इंडस्ट्री की व्यवसायिक संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए द इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेटल्स आईटीई ग्रुप पीएलसी के साथ मिलकर मिनरल्स, मेटल, मेटलर्जी एवं मटेरियल्स पर अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी एवं कांफ्रेंस (एमएमएमएम 2014) का आयोजन कर रहा है।
चार दिवसीय यह कार्यक्रम 4 से 7 सितंबर तक प्रगति मैदान में चलेगा। इसका उद्घाटन खनन, इस्पात, श्रम एवं रोजगार मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर करेंगे। इस दौरान तोमर विश्व मेटल फोरम का भी उद्घाटन करेंगे। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (सेल) के चेयरमैन सीएस वर्मा इसके मुख्य संरक्षक होंगे।
एमएमएमएम 2014 में इस्पात मंत्रालय, खनन मंत्रालय, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारी उद्योग मंत्रालय और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय का सहयोग है।