मैन्यूफैक्चरिंग की रफ्तार में आ रही कमी से परेशान केंद्र सरकार ने आज राज्य सरकारों से अपील की है कि अपने राज्यों में मैन्यूफैक्चरिंग जोन बनाएं। केंद्र सरकार इस कदम से मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में तेजी लाने और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद कर रही है। इसके अलावा केंद्र सरकार निवेश में तेजी लाने के लिए पॉलिसी के स्तर पर भी कई सारे कदम आने वाले दिनों में उठाने के संकेत दे रही है।
गुरुवार को वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा के साथ राज्यों के प्रमुख सचिवों और मुख्य सचिवों की बैठक में इस बात की अपील केंद्र सरकार द्वारा की गई है। बैठक के दौरान आनंद शर्मा ने कहा कि भूमि इस समय एक अहम मुद्दा है। राज्य भूमि-अधिग्रहण में अहम भूमिका अदा कर सकते हैं। इनके सहयोग से विश्वस्तरीय औद्योगिक शहरों को विकसित किया जा सकता है। शर्मा ने कहा कि इस लक्ष्य को पाने के लिए राज्यों को अहम भूमिका निभानी होगी। ऐसे में यह जरुरी है कि राज्य नेशनल इनवेस्टमेंट एंड मैन्यूफैक्चरिंग जोन के लिए भूमि का अधिग्रहण करें। उन्होंने कहा कि बिना मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में तेजी लाएं रोजगार के अवसर पैदा करना संभव नहीं है।
केंद्र सरकार ने नौ नेशनल इनवेस्टमेंट एंड मैन्यूफैक्चरिंग जोन को अधिसूचित किया है। जो कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र में स्थापित किए जाने हैं। उत्तर प्रदेश के तहत दादरी-नोएडा-गाजियाबाद निवेश क्षेत्र शामिल है। बैठक के दौरान शर्मा ने कहा कि यदि हम 15 जोन स्थापित कर लेते हैं, तो हमारे लिए काफी खुशी की बात होगी। इस मौके पर कैबिनेट सेक्रेटरी अजीत सेठ ने कहा कि सरकार निवेश में तेजी लाने के लिए कई तरह के कदम उठाने की तैयारी कर रही है। इसके तहत सरकार कई सारे नीतियों के स्तर पर कदम उठाएगी, जिससे कि निवेश में तेजी आ सके। जुलाई में देश का इंडस्ट्रियल आउटपुट केवल 0.1 फीसदी बढ़ा है। इसके तहत मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ नकारात्मक रही है।