वैश्विक ब्रोकरेज फर्म स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने इस वर्ष के अंत तक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये के मूल्य का अनुमान 53 रुपये घटाकर 60.5 रुपये प्रति डॉलर कर दिया है।
अमेरिकी डॉलर की लगातार मजबूती, भारतीय बाजार से लगातार धन की निकासी और रुपये की गिरावट को रोकने के लिए सख्त नीति की संभावना कम होने के कारण स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने अपने अनुमान में यह बदलाव किया है।
स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने अपने एक रिसर्च नोट में कहा है कि डॉलर के मुकाबले रुपये पर दबाव कम करने के लिए नीतिगत घोषणाएं महत्वपूर्ण हैं। रिपोर्ट के अनुसार देश के अस्थिर राजनीतिक हालात और आर्थिक सुधार की धीमी गति भी रुपये के लिए बड़ा खतरा पैदा कर रही है।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था में सुधार को देखते हुए फेड रिजर्व की ओर से राहत पैकेज वापस लेने के संकेत के बाद से ही रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर 60 के करीब पहुंच गया था। अंतर बैंकिंग मुद्रा बाजार में सोमवार सुबह के कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले 40 पैसे कमजोर होकर 59.67 के निचले स्तर तक लुढ़क आया।
स्टैंडर्ड चार्टर्ड के मुताबिक रुपये को संभालने के लिए सरकार को अर्थव्यवस्था में विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ाने के तत्काल उपाय करने होंगे। हालांकि, ब्रोकरेज फर्म ने यह आशंका भी जताई है कि 2014 आम चुनाव तक रुपये की स्थिति ऐसी ही बनी रह सकती है।
रुपये की कमजोरी का अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर पड़ेगा। इसका सबसे ज्यादा असर महंगाई बढ़ने के रूप में सामने आएगा। स्टैनचार्ट के अनुमान के मुताबिक रुपये में 10 फीसदी की कमजोरी प्रमुख महंगाई दर में 1.5-2.0 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकती है, जिससे रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम हो सकती है।