कंपनी बिल को संसद की मंजूरी से बाजार और उद्योग जगत खास उत्साहित है, पर इसके कुछ प्रावधानों को लेकर उसका मानना है कि इन्हें धीरे-धीरे चरणबद्ध ढंग से लागू किया जाना चाहिए। खासकर कंपनी के निदेशकों व लेखा परीक्षकों (ऑडिटर) में बदलाव (रोटेशन) के प्रावधान के बारे में कहा जा रहा है कि इसे पहले केवल सूचीबद्ध कंपनियों पर लागू करते हुए इसके परिणाम देखने के बाद ही अन्य कंपनियों को इसके दायरे में लाया जाए।
ऑडिट फर्म ग्रांट थ्रॉम्पटन के मैनेजिंग पार्टनर विशेष चंडोक का कहना है कि डायरेक्टरों और ऑडिटरों के रोटेशन के प्रावधानों को पहले देश की 8,000 सूचीबद्ध कंपनियों पर लागू किया जाना चाहिए। उसके बाद इसके नतीजे देखते हुए ही इसे अन्य कंपनियों पर लागू किया जाना चाहिए, क्योंकि ऐसा करके ही इसकी कमियों, व्यावहारिक स्तर पर पेश आने वाली दिक्कतों आदि का पता चल सकेगा। इन कमियों को दूर करने के उपाय करने के बाद इसे बाकी की कंपनियों पर लागू करना तर्कसंगत होगा।