स्वीडन की दिग्गज रिटेल कंपनी आईकिया के भारत में खुलने वाले फर्नीचर स्टोर के भीतर कैफे खुलने का रास्ता साफ होता दिख रहा है। लेकिन ये कैफे कई मायनों में अलग हो सकते हैं। सरकार आईकिया को सिर्फ इन-स्टोर कैफे खोलने की अनुमति दे सकती है जहां से खाने की चीजें बाहर नहीं जा सकेंगी। इस तरह भारत में आईकिया का ग्लोबल मॉडल भी कायम रहेगा और सिंगल ब्रांड रिटेल के नियमों का पालन भी हो सकेगा।
उद्योग मंत्रालय से जुड़े आला अधिकारियों का कहना है कि सरकार आईकिया स्टोर के ग्लोबल मॉडल से मौटे तौर पर सहमत है, लेकिन सिंगल ब्रांड रिटेल की पाबंदियों के चलते कैफे से खाने की चीजें बाहर ले जाने की अनुमति मिलना मुश्किल है। ऐसे में बीच का रास्ता निकालते हुए इन-स्टोर कैफे खोलने की मंजूरी दी जा सकती है।
रिटेल में एफडीआई प्रस्ताव की शुरुआती जांच करने वाले औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) के अधिकारियों का मानना है कि आईकिया के मूल प्रस्ताव में कई खामियां थीं। कंपनी ने बेवजह स्टोर में बिकने वाले उत्पादों को बहुत ज्यादा श्रेणियों में बांटकर पेश किया। इसी वजह से उसके मूल प्रस्ताव को मंजूरी मिलने में दिक्कतें आ रही हैं। आईकिया ने जो नया प्रस्ताव भेजा है उसमें उत्पादों की श्रेणियों को बहुत सीमित कर दिया है।
आईकिया के एफडीआई प्रस्ताव की बाधाओं को दूर करने के लिए उद्योग मंत्रालय पुरजोर कोशिशें कर रहा है। कंपनी भारत में स्टोर अपने ग्लोबल मॉडल की तर्ज ही खोलना चाहती है जिसमें कैफेटेरिया का खास महत्व है। लेकिन पिछले महीने वित्त मंत्रालय के तहत काम करने वाले विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) ने सिंगल ब्रांड का हवाला देते हुए फूड, टेक्सटाइल, लेदर आदि कई तरह के उत्पादों की बिक्री को मंजूरी नहीं दी थी। आईकिया का भारत में करीब 10 हजार करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है, जिसमें से सिर्फ 4,200 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को मंजूरी मिली है। सोमवार को होने वाली एफआईपीबी की बैठक में इस मामले पर कोई निर्णय लिया जा सकता है।