इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जोर के बीच उम्मीद है कि आगामी बजट में स्मार्ट सिटी परियोजना पर खासा जोर देखने को मिलेगा। बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली करीब 50,000 करोड़ रुपये की लागत से देश के बंदरगाहों (पोर्ट) वाले प्रमुख शहरों में 12 स्मार्ट सिटी की स्थापना की घोषणा कर सकते हैं।
सरकार से जुड़े सूत्रों का बताना है कि इसका ब्लूप्रिंट तैयार हो चुका है और बजट में घोषणा के साथ ही इस प्रोजेक्ट का काम शुरू हो जाएगा। जानकारी के मुताबिक इन शहरों और बंदरगाहों के पास जहाजरानी मंत्रालय के पास बहुतायत में जमीन होने के चलते परिवहन और जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी ने इसकी योजना तैयार कर ली है। योजना के मुताबिक हर पोर्ट के पास एक स्मार्ट सिटी विकसित की जाएगी। इसकी लागत 3,000 से 4,000 करोड़ रुपये होगी। यह शहर न केवल पर्यावरण के अनुकूल होंगे, बल्कि इनमें बिजली संबंधी जरूरतों को पूरा करने पर सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा जैसे स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों पर जोर दिया जाएगा। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बनने वाले इन शहरों का काम इसी साल की दूसरी छमाही में शुरू हो जाने की उम्मीद है। स्मार्ट सिटी का काम पांच साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य होगा।
जहाजरानी मंत्रालय और उपग्रह चित्रों के मुताबिक देश के 12 प्रमुख बंदरगाहों के आसपास केंद्र सरकार के पास करीब 2.64 लाख एकड़ जमीन उपलब्ध है। इनमें से केवल मुंबई पोर्ट ट्रस्ट के पास ही 753 हेक्टेयर जमीन मौजूद है। इसकी कीमत 46,000 करोड़ रुपये के करीब है। जहाजरानी मंत्रालय जीपीएस तकनीक के जरिए अपनी इन भू संपत्तियों के आकलन का काम पहले ही शुरू कर चुकी है। मंत्रालय निजी कंपनियों या बिल्डरों को जमीन बेचने के पक्ष में नहीं है। इसके बावजूद स्मार्ट सिटी के विकास में निजी क्षेत्र को बड़ी भूमिका दी जा सकती है।
जानकारी के मुताबिक सरकार की योजना हर स्मार्ट सिटी को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करने की है। इसके तहत इन शहरों में चौड़ी सड़कें बनाई जाएंगी। स्वच्छ ऊर्जा पर फोकस के साथ हरियाली पर भी खास ध्यान दिया जाएगा। इन शहरों में जहाज बनाने और पुराने जहाजों को तोड़ने की सुविधा के साथ-साथ स्पेशल इकनॉमिक जोन (सेज) की भी स्थापना की जाएगी। स्मार्ट सिटी के कुशल प्रबंधन के लिए ई-गवर्नेंस लिंक भी तैयार किए जाएंगे। इन शहरों में मकानों के साथ-साथ, स्कूल और कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।
देश के 12 प्रमुख बंदरगाहों में कांडला, मुंबई, केईपीटी, मर्मगओ, न्यू मंगलोर, कोचीन, चेन्नई, एन्नोर, वीओ चिदंबरनार, विशाखापत्तनम, पारादीप और कोलकाता (हल्दिया सहित) शामिल हैं। देश का करीब 61 फीसदी आयात-निर्यात इन बंदरगाहों से ही होता है। इन बंदरगाहों में से कुछ पर बायो डीजल प्लांट लगाने की भी योजना है, जिनमें हल्दिया भी शामिल है। इन संयंत्रों में इस्तेमाल किए जा चुके पाम ऑयल से डीजल बनाया जाएगा। गौरतलब है कि केंद्र सरकार देश के प्रमुख बंदरगाहों की क्षमता बढ़ाने की योजना पर पहले से ही काम कर रही है। इसके तहत इसके तहत पोर्ट की क्षमता मौजूदा 80 करोड़ टन से बढ़ाकर 160 करोड़ टन करने का लक्ष्य है।