कर्मचारियों की हड़ताल और तालाबंदी की मार झेल रही किंगफिशर एयरलाइंस की मुश्किलें लाइसेंस रद्द होने से बढ़ जाने के बावजूद निचले भाव पर पहुंचे इसके शेयर निवेशकों को खासा लुभा रहे हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के साथ-साथ छोटे निवेशकों ने भी किंगफिशर के शेयर खरीदने में रुचि दिखाई है।
30 सितंबर को समाप्त हुई तिमाही के दौरान एफआईआई ने जहां किंगफिशर के शेयरों की खरीदारी करके कंपनी में अपनी हिस्सेदारी तकरीबन दुगनी करते हुए 2.46 फीसदी कर ली है। स्टॉक एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक जुलाई-सितंबर तिमाही से पहले किंगफिशर में एफआईआई की हिस्सेदारी महज 0.98 फीसदी थी।
दूसरी ओर कंपनी के शेयरों में एक लाख रुपये तक का निवेश करने वाले छोटे खुदरा निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ कर 17.59 फीसदी पर पहुंच गई है। आंकड़ों के मुताबिक बीती तिमाही के दौरान इसमें 3.81 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
इसके अलावा एक लाख रुपये से अधिक के शेयर खरीदने वाले निवेशकों (एचएनआई) की हिस्सेदारी में 4.59 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दूसरी ओर किंगफिशर के प्रोमोटरों की हिस्सेदारी में तिमाही के दौरान मामूली गिरावट देखने को मिली है। यह 35.86 फीसदी से घटकर 35.83 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई है।
इसके अलावा एयरलाइन में बैंकों, वित्तीय कंपनियों, बीमा कंपनियों व म्यूचुअल फंड हाउसों जैसे संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी में भी कमी आई है। बीती तिमाही के दौरान इनके शेयर 15.60 फीसदी से घटकर 14.18 फीसदी पर आ गए हैं। घरेलू संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी भी पिछले तीन महीनों के दौरान 13.20 फीसदी से मामूली घटकर 13.14 फीसदी के स्तर पर आ गई है।
गौरतलब है कि करीब सालभर पहले 31 रुपये के भाव पर रहने वाला किंगफिशर का शेयर अगस्त में गिरकर 7.01 रुपये के निचले स्तर पर आ गया था। हालांकि इसके बाद इसमें सुधार आया है और फिलहाल यह 11 रुपये प्रति शेयर के आसपास कारोबार करता देखा जा रहा है।