मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र के खराब प्रदर्शन और कमजोर मानसून के चलते खरीफ सीजन में कृषि उत्पादन में आई गिरावट के चलते चालू वित्तवर्ष (2012-13) की दूसरी तिमाही (जुलाई से सितंबर, 2012) में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की विकास दर घटकर 5.3 फीसदी रह गई।
इसके पहले साल (2011-12) की दूसरी तिमाही में जीडीपी की विकास दर 6.7 फीसदी रही थी, जबकि चालू वित्तवर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल से जून) में जीडीपी विकास दर 5.5 फीसदी रही थी। वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने कहा है कि दूसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़े अनुमान से कम है।
शुक्रवार को केंद्रीय सांख्यिकीय संगठन (सीएसओ) द्वारा जारी चालू वित्तवर्ष की दूसरी तिमाही के जीडीपी के पहले आरंभिक अनुमानों में यह जानकारी दी गई है। इस दौरान कृषि और सहयोगी क्षेत्र की विकास दर मात्र 1.2 फीसदी रही है, जबकि मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र की विकास दर महज 0.8 फीसदी दर्ज की गई। वहीं, सेवा क्षेत्र की विकास दर 9.4 फीसदी रही है।
इन आंकड़ों के बाद एक बार फिर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) पर ब्याज दरों में कमी का दबाव बढ़ जाएगा, क्योंकि सरकार की कोशिश है कि महंगाई और विकास दर के बीच संतुलन बनाने की जरूरत है। पिछले दो तिमाहियों में जीडीपी के आंकड़ों को देखते हुए माना जा रहा है कि चालू वित्तवर्ष में आर्थिक विकास दर गत एक दशक में सबसे कम रहेगी।