आरबीआई द्वारा सस्ते आवास (अफोर्डेबल हाउसिंग) को इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा दिए जाने से होम फाइनेंस कारोबार पर क्या असर होगा?
आरबीआई के कदम से निश्चित तौर पर अफोर्डेबल (सस्ते) मकानों को बूस्ट मिलेगा। बैंक रीयल एस्टेट सेक्टर को सस्ता और ज्यादा कर्ज दे सकेंगे। इससे पूरी इंडस्ट्री को बूस्ट मिलेगा। यहीं नहीं, हाउसिंग सेक्टर में तेजी आने से उससे जुड़े दूसरे सेक्टर जैसे कि सीमेंट, आयरन एंड स्टील आदि के उत्पादों की मांग भी बढ़ेगी।
क्या नए कदम से हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के लिए बैंकों से पूंजी जुटाना आसान हो सकेगा?
देखिए, अभी आरबीआई के कदम से सीधे तौर पर बैंकों को फायदा होगा। प्राथमिकता क्षेत्र में आने से रिफाइनेंसिंग की दरें कम होंगी, जिसका फायदा हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों को बैंकों से सस्ते कर्ज के रूप में मिल सकेगा। आरबीआई ने बैंकों को लंबी अवधि के इंफ्रास्ट्रक्चर बांड जारी करने पर एसएलआर और सीआरआर की छूट दी है। हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों को यह लाभ फिलहाल नहीं मिलेगा।
क्या हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां को भी नेशनल हाउसिंग बैंक से सस्ते घर के लिए छूट की जरूरत है?
होम लोन कारोबार में हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों की हिस्सेदारी 39 फीसदी है। आरबीआई बैंकों के जरिए अफोर्डेबल हाउसिंग सेक्टर को ही बूस्ट देना चाहता है। हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां पूरी तरह से होम लोन का कारोबार करती हैं। ऐसे में यदि हमें एसएलआर छूट की सुविधा मिलती है, तो इस कदम से हाउसिंग को एक बड़ा बूस्ट मिलेगा। खासतौर से छोटे शहरों में तेजी से मांग बढ़ेगी। साथ ही ग्राहकों को भी ब्याज दर में करीब 0.5 फीसदी तक की कमी का लाभ मिल सकेगा।
अभी होम लोन की मांग कैसी है, क्या आर्थिक सुस्ती के कारण घरों की कीमतों में कमी आई है?
हाउसिंग फाइनेंस कारोबार में 25-30 फीसदी की ग्रोथ संभव है, जो कि आर्थिक सुस्ती के कारण घटकर फिलहाल 13-14 फीसदी पर है। लोगों ने घरों को खरीदना टाल दिया है। इसके बावजूद कीमतों में कमी नहीं है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि घर सभी की जरूरत है। डेवलपर्स जानते हैं कि ग्रोथ रेट जैसे ही बढ़ेगी, माहौल सुधरेगा, तो घरों की रुकी मांग में तेजी आएगी।
हाउसिंग सेक्टर के लिए लंबी अवधि का कर्ज जुटाना आसान नहीं है, इसे बूस्ट देने के लिए सरकार को कैसे कदम उठाने चाहिए?
अभी के माहौल में लंबी अवधि के लिए पूंजी लगाने से लोग कतरा रहे हैं। एफडी में ज्यादातर 2-3 साल के लिए निवेश हो रहा है, जबकि हाउसिंग सेक्टर को लंबी अवधि के कर्ज की जरूरत है। सरकार को चरणबद्ध तरीके से लंबी अवधि का डेट मार्केट विकसित करना होगा। इसी तरह बैंक और हाउसिंग कंपनियों के संबंध को भी बदलना होगा। बैंकों के लिए हाउसिंग फाइनेंस उनके बड़े कारोबार का एक छोटा सा हिस्सा है, जबकि हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों का कारोबार पूरी तरह से उसी पर टिका है। इसे देखते हुए जरूरी है कि बैंक और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों में थोक विक्रेता और रिटेलर का संबंध हो, जिससे पूरे सेक्टर को बूस्ट मिले।
सुंदरम होम फाइनेंस दक्षिण भारत पर ही ज्यादा केंद्रित है, क्या उत्तर भारत में भी विस्तार की योजना है?
हम यह महसूस कर रहे हैं कि अब समय आ गया है कि कंपनी उत्तर भारत में तेजी से विस्तार करे। इसे देखते हुए कंपनी गुजरात, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा जैसे राज्यों में विस्तार करेगी। कंपनी मेट्रो शहरों की जगह टियर-1 और टियर-2 शहरों पर फोकस करेगी। अभी कंपनी की देशभर में 106 शाखाएं हैं। अगले दो साल में हम इसमें कम से कम 20 की बढ़ोतरी करेंगे।
हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर में गैर निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) की क्या स्थिति है, क्या डूबे कर्ज की रिकवरी बढ़ी है?
सेक्टर में एनपीए काफी कम है, आर्थिक सुस्ती का थोड़ा असर हुआ है। सुंदरम होम फाइनेंस का नेट एनपीए ताजा आंकड़ों के मुताबिक 0.46 फीसदी है। जहां तक रिकवरी की बात है, इस दिशा में नए सिरे से देखने की जरूरत है। मौजूदा सरफेसी एक्ट में भी संशोधन की जरूरत है। कानून में कई ऐसे छद्म (ग्रे) क्षेत्र हैं, जिनका अलग-अलग स्तर पर विश्लेषण हो रहा है। ऐसे में कानून को नए सिरे से देखने की जरूरत है।